दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यू राजेंद्र नगर में लगने वाले साप्ताहिक बाजार की अव्यवस्था और अतिक्रमण पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों ...
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यू राजेंद्र नगर में लगने वाले साप्ताहिक बाजार की अव्यवस्था और अतिक्रमण पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि रोजगार कमाने के अधिकार की आड़ में स्थानीय नागरिकों के रास्ते बंद करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने चेतावनी दी कि यदि तय नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया गया, तो इस साप्ताहिक बाजार को पूरी तरह से बंद करने का कड़ा आदेश जारी किया जा सकता है।
🏛️ 2. वैकल्पिक जगह न मिलने पर सख्त शर्तों के साथ बाजार जारी रखने का अंतरिम फैसला, आरडब्ल्यूए ने उठाई थी समस्याएं
सुनवाई के दौरान नगर निगम (MCD) ने अदालत को बताया कि बाजार को शिफ्ट करने के लिए कई वैकल्पिक स्थलों का जायजा लिया गया था, लेकिन स्थानीय विरोध और जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं के कारण जगह उपयुक्त नहीं मिल पाई। इस पर बेंच ने सख्त नियमों और पाबंदियों के साथ बाजार जारी रखने का अंतरिम आदेश दिया। करोल बाग की न्यू राजेंद्र नगर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने याचिका दायर कर बताया था कि बाजार के कारण लोगों का घर पहुंचना मुश्किल हो जाता है और इलाके में चोरी-झपटमारी की घटनाएं भी बढ़ती हैं।
🛑 3. दुकानदारों और प्रशासन के लिए तय की गई कड़ी पाबंदियां, ट्रैफिक और स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य
अदालत ने बाजार के संचालन के लिए स्पष्ट पाबंदियां तय की हैं, जिनके तहत हर विक्रेता केवल 6x4 फीट के निर्धारित दायरे में दुकान लगाएगा और घरों के प्रवेश द्वारों या रास्तों में बाधा नहीं डालेगा। बाजार से यातायात बाधित न हो इसकी जवाबदेही वेंडर्स की होगी, जबकि इलाके के एसएचओ और एमसीडी के सहायक आयुक्त को नियमित रूप से सुरक्षा व स्वच्छता की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रोविजनल सर्टिफिकेट वाले विक्रेता सड़कों पर स्थायी जगह का दावा नहीं कर सकते।

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