उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को अवैध बताकर ध्वस्त किए जाने के बाद सूबे की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस कार्...
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को अवैध बताकर ध्वस्त किए जाने के बाद सूबे की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय (कोर्ट) जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें तानाशाही के तहत घर में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) किया गया है और देश में संविधान का गला घोंटा जा रहा है। इकरा हसन ने दो टूक कहा कि इस कार्रवाई के लिए कोई मोहलत नहीं दी गई और यह स्पष्ट रूप से लोकतंत्र की हत्या है।
⚖️ 2. बोलीं इकरा हसन- '1947 से पहले की है मस्जिद, अगर ऐसे ही फैसले लेने हैं तो अदालतों को बंद कर देना चाहिए'
सांसद इकरा हसन ने दावा किया कि यह मस्जिद 1947 से पहले की बनी हुई है, लेकिन तमाम नियमों और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सभी फैसले केवल सरकार की मनमर्जी और त्वरित प्रक्रिया से ही लिए जाने हैं, तो फिर कानून-व्यवस्था या न्यायिक प्रणाली की कोई आवश्यकता ही नहीं रह जाती और अदालतों को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विध्वंस राजनीतिक रूप से प्रेरित था जिसका उद्देश्य एक विशेष समुदाय को निशाना बनाना है।
🏛️ 3. मायावती और AIMIM ने भी सरकार पर साधा निशाना, सहारनपुर की घटना को लेकर राजनीतिक दलों में छिड़ी बहस
इस पूरे घटनाक्रम पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का भी बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यभर में मस्जिदों को अवैध बताकर ढहाए जाने वाले सरकारी अभियान की कड़ी निंदा की और कहा कि एक संवैधानिक सरकार का दायित्व सभी धर्मों के स्थलों का सम्मान करना है। इसके साथ ही, एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रवक्ता शादाब चौहान ने भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए इस मुद्दे पर सवाल खड़े किए हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा काफी चढ़ गया है।

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