उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कचहरी परिसर स्थित मस्जिद के एक हिस्से पर प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों और धार्मिक गुरु...
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कचहरी परिसर स्थित मस्जिद के एक हिस्से पर प्रशासन द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक दलों और धार्मिक गुरुओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि जो लोग दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते और दूसरों की आस्था के साथ खिलवाड़ करते हैं, वे कभी सच्चे सनातनी नहीं हो सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सरकार के इशारे पर यह जल्दबाजी भरा कदम उठाया है ताकि पीड़ित पक्ष को उच्च न्यायालय से न्याय न मिल सके।
⚖️ 2. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उठाए सवाल, कहा- 'आखिर इतनी जल्दी क्या थी, क्या उत्तर प्रदेश में रूल ऑफ लॉ खत्म हो चुका है?'
इस मामले पर असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा रुख अपनाते हुए सरकार से सवाल किया कि आखिर सुबह 5 बजे नाकाबंदी करके मस्जिद को गिराने की इतनी जल्दी क्या थी? उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार इस मामले को ऊपरी अदालतों तक नहीं पहुंचने देना चाहती थी। ओवैसी ने इसे संविधान और देश के कानून की धज्जियां उड़ाना करार दिया। वहीं, शिया धर्म गुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी डीएम के उस शपथ का हवाला दिया जिसमें आजादी से पहले बने हर धर्मस्थल के वजूद को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
🕌 3. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने की मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग, कहा- ब्रिटिश शासनकाल (वर्ष 1910) से वजूद में थी यह ऐतिहासिक जगह
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भी इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई है और सरकार से उसी स्थान पर मस्जिद को दोबारा बनवाए जाने की मांग की है। उनका दावा है कि यह मस्जिद ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1910 में बनाई गई थी और तब से लगातार यहां इबादत की जा रही थी। मौलाना ने आरोप लगाया कि मस्जिद कमेटी के पास इसके पुराने दस्तावेज मौजूद थे, जिन्हें प्रशासनिक अधिकारियों ने देखने से इनकार कर दिया और इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया।

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