सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट करुणा नंदी ने कोर्ट के सामने कई अहम मा...
सुप्रीम कोर्ट में मैरिटल रेप से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट करुणा नंदी ने कोर्ट के सामने कई अहम मामले रखे, जबकि सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने दर्ज एफआईआर और उसे रद्द करने की मांग वाली याचिका का जिक्र किया. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक तीखा सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या शादी का मतलब किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आजादी का खत्म होना है?
🏛️ 2. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अगले महीने तय की अंतिम सुनवाई, केंद्र सरकार के हलफनामे के बाद दिए निर्देश
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने निर्देश दिया है कि इस मामले की अंतिम सुनवाई अब से तीन सप्ताह बाद बुधवार और गुरुवार को की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश केंद्र सरकार द्वारा मामले में अपना हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी से किसी महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और स्वायत्तता खत्म नहीं हो जाती है, हालांकि इस मामले में मुकदमा चलाने से पहले BNS के कानूनी प्रावधानों को देखना होगा.
🔍 3. मैरिटल रेप अपवाद की संवैधानिक वैधता और मुकदमे की योग्यता पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र ने किया था विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह मुख्य रूप से दो बड़े सवालों की जांच करेगा—पहला यह कि क्या मैरिटल रेप का अपवाद लागू रहने के बावजूद मुकदमा चलाना संभव है, और दूसरा यह कि क्या यह अपवाद खुद संवैधानिक रूप से वैध है. बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने का कड़ा विरोध करते हुए इसे विवाह संस्था के लिहाज से अत्यधिक कठोर बताया था.

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