दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले 14 वर्षों से दिल की सर्जरी का इंतजार कर रही एक किशोरी ने मंगलवार को आखिरकार दम त...
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले 14 वर्षों से दिल की सर्जरी का इंतजार कर रही एक किशोरी ने मंगलवार को आखिरकार दम तोड़ दिया। मृतका किशोरी तनवी राजस्थान के कोटा की रहने वाली थी और उसके दिल में जन्म से ही छेद था। मृतका के पिता मुकेश कुमार का आरोप है कि अस्पताल के टालमटोल रवैये के कारण जानबूझकर उनकी बेटी की समय पर सर्जरी नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें अपनी जवान बेटी को खोना पड़ा।
⏳ 2. सवा चार लाख रुपये जमा करने और चार यूनिट खून देने के बाद भी पिता काटता रहा चक्कर
पीड़ित पिता मुकेश कुमार के अनुसार, वह अपनी बेटी की सर्जरी के लिए साल 2012 से दिल्ली एम्स के चक्कर काट रहे थे। उन्होंने एम्स में सर्जरी के लिए सवा चार लाख रुपये भी जमा करवा दिए थे और चार यूनिट खून की व्यवस्था भी कर ली थी। डॉक्टरों ने पहले 2015 की तारीख दी, लेकिन कभी इंप्लांट न होने तो कभी दांतों की समस्या बताकर सर्जरी बार-बार टाली जाती रही। पिता ने न्याय के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कार्डियोथोरेसिक विभाग से कोई ठोस तारीख नहीं मिल सकी।
🏥 3. एम्स प्रशासन की सफाई—कहा, 'साल 2018 में मेडिकल बोर्ड ने सर्जरी को बताया था असंभव, दवाओं से चल रहा था इलाज'
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली एम्स की मीडिया डिवीजन की प्रभारी डॉ. रीमा दादा ने स्पष्ट किया कि बच्ची को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट के साथ पल्मोनरी एट्रेशिया (फेफड़ों तक रक्त ले जाने वाली धमनियों की अनुपस्थिति) जैसी गंभीर बीमारी थी। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, वर्ष 2018 में ही यह स्पष्ट हो चुका था कि बच्ची की सर्जरी संभव नहीं है और उसका इलाज केवल दवाइयों के माध्यम से ही किया जा सकता है, जिसके तहत उसका मेडिकल ट्रीटमेंट लगातार जारी रखा गया था।

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