दिल्ली में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है क...
दिल्ली में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (BLA) पर मतदाता के फॉर्म में दर्ज हर एक जानकारी की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती. जस्टिस अमित बंसल ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 का हवाला देते हुए कहा कि BLA से केवल उतनी ही जिम्मेदारी ली जा सकती है जिसकी वह वास्तविक रूप से जांच कर सके, जैसे कि फॉर्म में लगी तस्वीर का मिलान करना.
🏛️ 2. चुनाव आयोग की अंडरटेकिंग शर्त को दी गई थी चुनौती, BLA के लिए हर डेटा की जांच करना असंभव
यह पूरा मामला दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव द्वारा हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका से जुड़ा है. याचिका में चुनाव आयोग के उस निर्देश को चुनौती दी गई थी जिसमें BLA से यह लिखित अंडरटेकिंग मांगी जा रही थी कि उन्होंने फॉर्म में भरी गई सभी जानकारियों की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि कर ली है. अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील से सहमति जताई कि वैधानिक जांच और सत्यापन का मुख्य दायित्व असल में BLO, AERO और ERO जैसे चुनाव अधिकारियों का होता है.
📋 3. 2002 की वोटर लिस्ट उपलब्ध कराने की मांग पर भी उठी बात, दोहरी प्रविष्टि रोकने में मिलेगी मदद
याचिका में यह भी मांग उठाई गई थी कि राजनीतिक दलों को वर्ष 2002 की मतदाता सूची की प्रिंटेड और डिजिटल (सॉफ्ट) कॉपी उपलब्ध कराई जाए. दलील दी गई कि पुराने रिकॉर्ड्स मिलने से BLA को यह वेरिफाई करने में आसानी होगी कि किसी भी मतदाता का नाम दो अलग-अलग जगहों पर दर्ज तो नहीं है, या मतदाता सूची में कोई अन्य त्रुटि तो मौजूद नहीं है. हाईकोर्ट के इस आदेश से राजनीतिक दलों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े एजेंटों को बड़ी राहत मिली है.

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