दिल्ली में कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान, तेज, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्त...
दिल्ली में कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान, तेज, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 'दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' को मंजूरी दे दी गई है। इस बिल का मुख्य उद्देश्य राजधानी में उद्यमों के लिए मंजूरियों, पंजीकरण, लाइसेंस और अन्य अनुमतियों को प्राप्त करने की पुरानी और जटिल प्रक्रिया में मूलभूत बदलाव लाना है, जिससे कारोबारियों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
🪟 2. सिंगल विंडो सिस्टम और स्व-घोषणा का प्रावधान, डीएसआईआईडीसी बनेगी एकल नोडल एजेंसी
प्रस्तावित कानून के तहत एक ऑनलाइन और उपयोग में आसान 'सिंगल विंडो सिस्टम' बनाया जाएगा, जहां कारोबारी भवन योजनाओं, अग्निशमन, पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन जैसी सभी अनुमतियों के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIDC) को एकल नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके अलावा, कम जोखिम वाली श्रेणियों और तय सीमाओं के मामलों में स्व-घोषणा स्वीकार की जाएगी तथा तय समय सीमा में मंजूरी न मिलने पर उसे स्वतः वैधानिक मंजूरी मान लिया जाएगा।
🛡️ 3. तीन साल तक नहीं होंगे सामान्य निरीक्षण, 'जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमत है' के सिद्धांत पर होगा काम
कारोबारियों को राहत देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि किसी उद्यम के पंजीकरण के बाद शुरुआती 3 साल तक कोई सामान्य निरीक्षण नहीं किया जाएगा। साथ ही, जीएसटी या एमएसएमई जैसे अन्य कानूनों के तहत पंजीकृत उद्यमों को अलग से व्यापार या दुकान पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। सरकार 'नेगेटिव लिस्ट' आधारित व्यवस्था अपना रही है, जिसका मूल सिद्धांत होगा कि "जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमत है।" इस बिल को अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा।

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