दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज में कथित लापरवाही और भारी देरी की वजह से 16 साल की एक बच्ची तनवी की दर्दनाक मौत ह...
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज में कथित लापरवाही और भारी देरी की वजह से 16 साल की एक बच्ची तनवी की दर्दनाक मौत हो जाने का मामला सामने आया है। मृतका के पिता मुकेश परियानी ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि वे साल 2012 से अपनी बेटी के इलाज के लिए एम्स के चक्कर काट रहे थे। विभिन्न कमरों और विभागों के बीच कागजी कार्रवाई और जांच-पड़ताल का यह सिलसिला सालों तक चलता रहा, लेकिन समय पर ऑपरेशन नहीं किया गया।
📜 2. ऑपरेशन के नाम पर साल दर साल टालते रहे डॉक्टर, शिकायत दर्ज कराने पर भी नहीं हुई सुनवाई
पिता ने दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्होंने 4 अप्रैल 2014 को ही ऑपरेशन के लिए पैसे और खून जमा कर दिए थे, जिसके बाद उन्हें कई तारीखें दी गईं लेकिन हर बार बहाना बनाकर सर्जरी टाल दी जाती थी। जब उन्होंने अस्पताल के पीएमओ (PMO) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, तो आरोप है कि डॉक्टर सचिन तलवार ने शिकायत वापस लेने तक ऑपरेशन करने से साफ मना कर दिया। परिवार लगातार अस्पतालों के चक्कर काटता रहा, कभी डॉक्टर छुट्टी पर मिले तो कभी उन्हें यह कहकर टरका दिया गया कि बच्ची सिर्फ दवा से ठीक हो जाएगी।
⚖️ 3. न्याय की गुहार लगा रहा गमगीन परिवार, डॉक्टरों की लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
वर्ष 2026 की शुरुआत में भी जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला और लगातार केवल टेस्ट ही किए जाते रहे, तो अंततः मंगलवार को बच्ची की मौत हो गई। अपनी जवान बेटी को खोने के बाद मां भाविका परियानी का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि यदि समय रहते 2015 या 2016 में ऑपरेशन कर दिया जाता तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी, इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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