नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने वाले लगभग 25 हजार लोगों से जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के कथित डायवर्जन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (...
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने वाले लगभग 25 हजार लोगों से जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के कथित डायवर्जन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अत्यंत गंभीर आरोप पेश किए हैं। ED ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि Jaypee Infratech Ltd (JIL) ने घर खरीदारों से आवासीय परियोजनाओं के निर्माण के लिए जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा आवासीय सोसायटियों पर खर्च करने के बजाय फॉर्मूला वन (F1) ट्रैक, सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, चैरिटेबल ट्रस्ट और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ी अन्य गतिविधियों में अवैध रूप से इस्तेमाल किया।
💸 25,000 खरीदारों से जुटाए गए थे 32,825 करोड़ रुपये: हर 1 रुपये में से 42 पैसे डायवर्ट
प्रवर्तन निदेशालय की जांच रिपोर्ट के अनुसार, जेपी समूह ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अपनी विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के लिए करीब 25,000 होमबायर्स से कुल 32,825 करोड़ रुपये एकत्र किए थे:
डायवर्जन का आंकड़ा: जुटाए गए कुल फंड में से 13,833 करोड़ रुपये कथित तौर पर दूसरी संस्थाओं, ट्रस्टों और वाणिज्यिक परियोजनाओं की ओर डायवर्ट कर दिए गए।
गणितीय अनुपात: जांच एजेंसी के दावे के मुताबिक, घर खरीदारों द्वारा अपनी गाढ़ी कमाई से दिए गए हर एक रुपये में से लगभग 42 पैसे आवासीय मकानों के निर्माण पर खर्च ही नहीं किए गए, बल्कि अन्य प्रोजेक्ट्स में लगा दिए गए।
🏛️ पूर्व CMD मनोज गौड़ की जमानत याचिका पर सुनवाई: 18 अगस्त को होगी अगली बहस
यह तथ्य जेपी इंफ्राटेक के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) मनोज गौड़ की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आए। ED ने गौड़ को नवंबर 2025 में वर्ष 2018 के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत गिरफ्तार किया था:
6 अलग-अलग माध्यमों से पैसों का हस्तांतरण: ED के स्टैंडिंग काउंसिल राहुल त्यागी ने कोर्ट में बताया कि डायवर्ट की गई 13,800 करोड़ रुपये की विशाल राशि 6 अलग-अलग चैनलों के माध्यम से ऐसी कंपनियों और संस्थाओं तक पहुंची, जिन पर पूरी तरह से मनोज गौड़ का नियंत्रण था।
संबंधित संस्थाएं: इनमें जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड, जयप्रकाश सेवा संस्थान और जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड प्रमुख रूप से शामिल हैं।
अनुचित वेतन का आरोप: ED ने यह भी आरोप लगाया कि 2009-10 से 2021-22 के बीच कंपनी के घाटे में होने के बावजूद गौड़ को जयप्रकाश असोसिएट्स लिमिटेड से 48.91 करोड़ रुपये का वेतन मिला, जो आम कर्मचारियों की औसत तनख्वाह से 93 गुना तक अधिक था। इस मामले में जमानत पर अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
🏗️ 13 वर्षों से अधूरे पड़े हैं हजारों आशियाने: जेपी विशटाउन के खरीदारों में भारी आक्रोश
इस पूरे घोटाले की जड़ में नोएडा के सेक्टर 128 स्थित जेपी ग्रीन्स विशटाउन और अन्य संबद्ध परियोजनाओं के खरीदारों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतें हैं:
"नोएडा में फैले जेपी विशटाउन की कई ऊंची इमारतें और फ्लैट्स आज भी अधूरे पड़े हैं। इनमें से अधिकांश खरीदारों ने वर्ष 2011 में अपने सपनों के घर की बुकिंग कराई थी। 13-14 साल बीत जाने के बाद भी हजारों परिवार अपने घर के कब्जे (Possession) के लिए तरस रहे हैं और साथ ही बैंक की ईएमआई देने को मजबूर हैं।"

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