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Delhi Traffic Jam Solution: सिंगापुर और लंदन की तर्ज पर दिल्ली में लागू होगा 'कंजेशन प्राइसिंग', 30% तक कम होगा ट्रैफिक

नई दिल्ली: दिल्ली की सड़कों पर रोजाना लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) के तहत ...

नई दिल्ली: दिल्ली की सड़कों पर रोजाना लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) के तहत 'कंजेशन प्राइसिंग' लागू करने का सुझाव दिया है।

इस योजना के अंतर्गत अत्यधिक भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक और संकरे इलाकों में प्रवेश करने वाले वाहनों पर अतिरिक्त शुल्क (कंजेशन टैक्स) लगाया जाएगा। साथ ही, पीक आवर्स के दौरान पार्किंग शुल्क भी बढ़ा दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, लंदन, पेरिस और सिंगापुर जैसे शहरों में इस व्यवस्था को अपनाने के बाद ट्रैफिक में 30% तक की कमी देखी गई है।

📍 किन इलाकों में लागू हो सकती है व्यवस्था: आरएफआईडी और फास्टैग से रखी जाएगी निगरानी

संभावित क्षेत्र और तकनीक:

  • संकरे व घनी आबादी वाले क्षेत्र: पुरानी दिल्ली का चांदनी चौक, सदर बाजार, जामा मस्जिद और चावड़ी बाजार।

  • प्रमुख व्यावसायिक केंद्र: कनॉट प्लेस (CP), जनपथ और करोल बाग।

  • तकनीक का उपयोग: वाहनों की आवाजाही को ट्रैक करने के लिए RFID टैग और फास्टैग (FASTag) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

  • लचीली पार्किंग दरें: इलाके की संवेदनशीलता और पीक/नॉन-पीक आवर्स के हिसाब से पार्किंग दरें तय की जाएंगी।

🌐 ग्लोबल मॉडल से सीख: सिंगापुर, लंदन और पेरिस का सफल अनुभव

विदेशी शहरों का मॉडल:

"सिंगापुर ने 1998 में ऑटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक टोल व्यवस्था लागू की, जहां ट्रैफिक की रफ्तार और समय देखकर हर 3 महीने में दरें बदलती हैं। वहीं, लंदन में 2003 में एंट्री फीस लगाने के बाद सड़कों पर गाड़ियां 18% कम हुईं और जाम 30% तक घट गया। पेरिस ने कारों की स्पीड लिमिट 30 किमी/घंटा तय कर पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों को प्राथमिकता दी है।"

❓ राजधानी के सामने 3 बुनियादी सवाल: पब्लिक ट्रांसपोर्ट और फीडर नेटवर्क कितना तैयार?

कार्यान्वयन की चुनौतियाँ:

  • सुविधाजनक विकल्प: क्या कनॉट प्लेस या करोल बाग जाने वाले लोगों के पास अपनी कार छोड़ने के बाद मेट्रो और बस का आरामदायक विकल्प मौजूद है?

  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: मेट्रो स्टेशन से उतरकर गंतव्य तक पहुंचने के लिए सुरक्षित ई-रिक्शा, फीडर बसें और वॉकवे का मजबूत ढांचा तैयार करना आवश्यक होगा।

  • रेवेन्यू का सही इस्तेमाल: क्या इस टैक्स से मिलने वाला पैसा अनिवार्य रूप से सिर्फ दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन के सुधार पर ही खर्च किया जाएगा?

🤝 मास्टर प्लान 2047 को लेकर डीडीए की कवायद: 3 महीनों में होंगी 20 से अधिक बैठकें

प्रशासनिक प्रक्रिया:

  • हितधारकों से चर्चा: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) आगामी तीन महीनों में जनप्रतिनिधियों, सरकारी एजेंसियों, पेशेवर संस्थाओं और जमीन मालिकों के साथ 20 से अधिक बैठकें आयोजित करेगा।

  • रणनीति तैयार करना: इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य एमपीडी-2047 के प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा करना और योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए समन्वय बनाना है।







 

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