नई दिल्ली: नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास रेस कोर्स इलाके में 53.242 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है। गुरुव...
नई दिल्ली: नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास रेस कोर्स इलाके में 53.242 एकड़ जमीन को केंद्र सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है।
गुरुवार को इस जमीन पर कब्जा करने के बाद इसकी देखभाल और रखरखाव के लिए इसे सेंट्रल पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट (CPWD) को सौंप दिया गया। यह कब्जा एस्टेट सर्विस ऑर्गनाइजेशन (ESO) के आदेश पर लिया गया। प्रॉपर्टी सौंपने और लेने के दस्तावेज में यह दर्ज है कि जमीन को 'जैसी है, जहां है' के आधार पर वापस लिया गया है।
लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस ने यह प्रॉपर्टी सीपीडब्ल्यूडी के E-डिविजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सौंपी। दोनों विभागों के अधिकारियों ने 53.242 एकड़ जमीन के कब्जे को लेने और सौंपने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से दर्ज करने के लिए दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
यह कार्रवाई 11 अगस्त, 2026 को एस्टेट ऑफिसर द्वारा जारी बेदखली के आदेश और पटियाला हाउस कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के 25 अगस्त के आदेश के बाद की गई है। कोर्ट ने दिल्ली रेस क्लब लिमिटेड की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें एस्टेट ऑफिसर के आदेश पर अंतरिम रोक (स्टे) लगाने की मांग की गई थी।
⚖️ दिल्ली रेस क्लब को दिए गए थे कई मौके: कोर्ट ने खारिज की पक्ष न सुनने की दलील
अदालती कार्यवाही का विवरण:
पर्याप्त अवसर दिए गए: कोर्ट ने नोट किया कि एस्टेट ऑफिसर ने दिल्ली रेस क्लब को अपना जवाब और सबूत पेश करने के कई मौके दिए थे।
साक्ष्य पेश करने में विफल: मौके मिलने के बावजूद क्लब अपना जवाब और सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिसके बाद एस्टेट ऑफिसर ने रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की।
दलील अमान्य: कोर्ट ने क्लब की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उसे अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया गया। कोर्ट ने कहा कि कार्यवाही से स्पष्ट है कि क्लब को पर्याप्त मौके दिए गए थे।
📜 1994 के बाद नहीं हुआ लीज का नवीनीकरण: किराए का भुगतान लीज रिन्यूअल नहीं माना जाएगा
कानूनी आधार और सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
"यह मामला 'पब्लिक प्रीमाइसेस (अनधिकृत कब्जा करने वालों को बेदखल करना) एक्ट' की धारा 5 के तहत बेदखली की कार्यवाही से जुड़ा है। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, 12 मार्च 2026 को एक नोटिस जारी कर दिल्ली रेस क्लब से 15 दिनों के भीतर जगह खाली कर शांतिपूर्ण तरीके से कब्जा सौंपने को कहा गया था। कोर्ट ने पाया कि 1994 के बाद किसी भी दस्तावेज से लीज का नवीनीकरण नहीं किया गया है। कोर्ट ने 'DDA बनाम आनंद राज एजेंसीज प्रा. लि.' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि लीज खत्म होने के बाद सिर्फ किराया देने से लीज रिन्यू नहीं हो जाती।"
⛔ स्टे का मामला नहीं बनता: 26 सितंबर को होगी मुख्य मामले की अगली सुनवाई
याचिका का निस्तारण:
याचिका खारिज: इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि दिल्ली रेस क्लब अंतरिम रोक (स्टे) पाने के लिए कोई ठोस शुरुआती आधार नहीं बना सका, इसलिए उसकी याचिका खारिज कर दी गई।
अगली सुनवाई: मुख्य मामले की सुनवाई 26 सितंबर 2026 के लिए तय की गई है। कोर्ट में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व उसके स्थायी वकील आशीष के. दीक्षित कर रहे हैं।

कोई टिप्पणी नहीं