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Delhi Power Subsidy Update: रेखा गुप्ता सरकार ला रही नया नियम, सक्षम लोग स्वेच्छा से छोड़ सकेंगे बिजली सब्सिडी

नई दिल्ली: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी का विकल्प चुनने की नई व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार...


नई दिल्ली:
दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी का विकल्प चुनने की नई व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस नई प्रणाली के तहत बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी तभी मिलेगी, जब वे स्वयं इसके लिए आवेदन करेंगे।

बीते कुछ वर्षों में दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके कारण सरकार के खजाने पर सब्सिडी का वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है। इसी बोझ को नियंत्रित करने के लिए सरकार यह कदम उठाने जा रही है।

💻 सब्सिडी जारी रखने के लिए हर साल कराना होगा अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: स्वेच्छा से छोड़ सकेंगे लाभ

नियम और पंजीकरण प्रक्रिया:

  • पोर्टल और पोर्टल लॉन्च: दिल्ली सरकार जल्द ही एक विशेष पोर्टल लॉन्च करने जा रही है, जहां आर्थिक रूप से सक्षम उपभोक्ता अपनी इच्छा से सब्सिडी छोड़ सकते हैं।

  • वार्षिक पंजीकरण: जो घरेलू उपभोक्ता सब्सिडी वाली बिजली का लाभ जारी रखना चाहते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष (Financial Year) में एक बार नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

  • 200 यूनिट तक मुफ्त: वर्तमान में 200 यूनिट तक मासिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 100% सब्सिडी (मुफ्त बिजली) मिलती है। वहीं 201 से 400 यूनिट तक की खपत पर 50% सब्सिडी (अधिकतम ₹800) का प्रावधान है।

📉 बजट में सब्सिडी फंड को किया गया नियंत्रित: दोगुने से ज्यादा हुआ वित्तीय बोझ

आंकड़े और बजटीय आवंटन:

"पिछले एक दशक में दिल्ली में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में भारी उछाल के कारण सब्सिडी का खर्च दोगुने से अधिक हो चुका है। फरवरी 2026 तक बिजली सब्सिडी पर खर्च की गई राशि ₹4,037.63 करोड़ तक पहुंच गई थी। हालांकि, चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए सरकार ने इस मद में ₹3,500 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।"

📊 दिल्ली में 73 लाख से अधिक उपभोक्ता: कैग रिपोर्ट में सब्सिडी लक्षित वर्ग तक न पहुंचने का था जिक्र

उपभोक्ता जनसांख्यिकी और सीएजी की सिफारिशें:

  • 84% से अधिक घरेलू कनेक्शन: दिल्ली में कुल बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 73 लाख के पार पहुंच चुकी है, जिसमें 84.1% हिस्सेदारी अकेले घरेलू श्रेणी की है।

  • कैग (CAG) का आकलन: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि योजना का लाभ उस अनुपात में वंचितों और जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है, जितना पहुंचना चाहिए, क्योंकि बड़े पैमाने पर उच्च खपत वाले श्रेणी के उपभोक्ता भी इसका लाभ उठा रहे थे।

  • पूर्व योजना की निरंतरता: वर्ष 2022 में तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने भी मिस्ड-कॉल प्रक्रिया के माध्यम से स्वैच्छिक सब्सिडी योजना शुरू की थी। अब वर्तमान सरकार इसे अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रतिवर्ष नवीनीकरण (Annual Renewal) की शर्त जोड़ने जा रही है।







 

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