गाजियाबाद: ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए महंगा सामान भेजना अब लोगों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। लैपटॉप, मोबाइल और टैबलेट जैसी कीमती चीजें...
गाजियाबाद: ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए महंगा सामान भेजना अब लोगों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। लैपटॉप, मोबाइल और टैबलेट जैसी कीमती चीजें डिलीवरी राइडर के जरिए भेजने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी पंकज ठाकुर के साथ सामने आया है। उन्होंने 17 अगस्त को नेहरू प्लेस (दिल्ली) से अपना लैपटॉप घर मंगाने के लिए ऑनलाइन डिलीवरी कंपनी की सेवा ली थी। राइडर ने दुकान से लैपटॉप लिया, लेकिन उसे लेकर रास्ते से गायब हो गया। कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो लैपटॉप मिला और न ही कंपनी की ओर से कोई ठोस मदद की गई।
📞 4 घंटे इंतजार के बाद कंपनी को किया फोन: दो दिन का मांगा समय, फिर भी नहीं मिला सुराग
घटना का पूरा क्रम:
नेहरू प्लेस से कराया था पिकअप: पंकज ठाकुर के मुताबिक, उन्होंने 17 अगस्त को लैपटॉप को नेहरू प्लेस स्थित डेटा रिकवरी प्वाइंट की दुकान से अपने घर पहुंचाने के लिए राइडर बुक किया था।
कंपनी का टालमटोल: राइडर दुकान से निकला, लेकिन चार घंटे बाद भी घर नहीं पहुंचा। कस्टमर केयर से संपर्क करने पर दो दिन का समय मांगा गया, लेकिन दो दिन बाद भी कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।
🛡️ मुआवजा मांगा तो कंपनी ने पॉलिसी का दिया हवाला: पीड़ित ने दर्ज कराई ई-एफआईआर
कंपनी का रवैया और कानूनी कदम:
"लैपटॉप नहीं मिलने पर जब पंकज ने सामान की कीमत के बराबर मुआवजा मांगा, तो कंपनी ने साफ कहा कि उसकी पॉलिसी के मुताबिक राइडर के गायब होने पर कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं है। कंपनी ने राइडर की जानकारी भी साझा नहीं की। इसके बाद पीड़ित ने कालकाजी थाने में ई-एफआईआर दर्ज कराई है।"
⚠️ छोटी डिलीवरी कंपनियों में ज्यादा परेशानी: बुकिंग से पहले शर्तें पढ़ना जरूरी
उद्योग विशेषज्ञों की राय:
साख और जवाबदेही: देश में काम कर रही कई छोटी डिलीवरी कंपनियां ग्राहक शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेतीं।
मुख्य सवाल: डिलीवरी पार्टनर के पास सामान पहुंचने के बाद अगर वह गायब हो जाए, तो जवाबदेही किसकी होगी? ग्राहकों को बुकिंग से पहले बीमा और सुरक्षा नियमों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।
⚖️ सामान गायब हो तो ग्राहक क्या करें? जानें अधिकार और शिकायत प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार उठाए जाने वाले जरूरी कदम:
पुलिस एफआईआर: सबसे पहले पुलिस में चोरी या धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराएं। इसमें राइडर का नाम, नंबर, वाहन विवरण और सामान का बिल संलग्न करें।
ई-दाखिल पोर्टल: यदि कंपनी मुआवजा देने से मना करे, तो उपभोक्ता ई-दाखिल पोर्टल (
e-daakhil.nic.in) के माध्यम से ऑनलाइन उपभोक्ता अदालत में केस दर्ज करा सकते हैं।डिजिटल सबूत रखें: डिलीवरी की रसीद, पेमेंट प्रूफ, चैट हिस्ट्री और कॉल रिकॉर्ड संभालकर रखें।

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