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गांधीवादी रास्ते पर चलकर मिली सफलता, सोनम वांगचुक ने राजघाट पर दी श्रद्धांजलि

सोनम वांगचुक ने एक बार फिर हुंकार भरी है। सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इ...


सोनम वांगचुक ने एक बार फिर हुंकार भरी है। सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा महज एक शुरुआत है। वांगचुक ने कहा कि अगर देश में शिक्षा के मुद्दे पर सही ढंग से काम किया गया तो देश की हालत बेहतर हो जाएगी। वांगचुक ने कहा कि अगर यहां से भी हालात में सुधार की तरफ कदम बढ़ाया जाए तो चीजें पूरी तरह से बदल सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस बारे में बातें शुरू हो चुकी हैं। मुझे उम्मीद है कि बेहद सकारात्मक बदलाव के साथ चीजों को सही रास्ते पर लाया जा सकता है।

🛡️ शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार, अधिकारियों से कार्रवाई न करने की गुहार

इसके साथ ही सोनम वांगचुक ने अधिकारियों से प्रोटेस्ट में शामिल होने वालों के खिलाफ ऐक्शन न लेने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है। जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल करने वाले वांगचुक ने कहा कि जो लोग शांति से विरोध कर रहे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अगर कुछ शरारती तत्व गलत इरादे से काम कर रहे हैं, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि कुछ नहीं होगा। हालांकि, मैं यह बहुत साफ करना चाहता हूं कि शांति से विरोध करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। इसे सम्मानित किया जाना चाहिए। बाकी मामले में, कानून अपना काम करेगा।

🙏 राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, प्रासंगिकता पर की बात

सोनम वांगचुक राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने भी पहुंचे। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश को बताना चाहता था कि महात्मा गांधी का बताया गया रास्ता आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना 100 साल पहले था। लोग कहते हैं कि ऐसे शासन के साथ ये तरीके नहीं चलते हैं। मुझे लगता है कि यह तरीका शासक से ज्यादा जनता के दिल तक संदेश पहुंचाता है। गौरतलब है कि वांगचुक ने नीट पेपर लीक तथा उसके बाद 22 अभ्यर्थियों की आत्महत्या पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 28 जून से यहां जंतर मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की थी। कुछ दिनों के बाद पुलिस ने वांगचुक को वहां से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था। सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कुछ आश्वासन दिये जाने के बाद उन्होंने 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त की थी।

शांति की अपील से मिलती है जीत, शासक जनता की सुनें

वांगचुक ने कहा कि कोई भी शासक हों, वे जनता की सुनते हैं, चाहे मेरी न सुनें। मैंने गांधी जी के प्रयोग को एक बार फिर सफल होते देखा। इससे पहले लद्दाख में हम गांधी जी के इस प्रयोग का उपयोग करते आए हैं और उसे बहुत प्रासंगिक देखा, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भी यह प्रासंगिक होगा, यह मुझे मालूम नहीं था। आज मुझे तसल्ली हुई कि 100 साल बाद भी यह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि मैं भारत और विश्व की जनता से यही कहूंगा कि वे बापू के दिखाये शांति के रास्ते पर ही चलें। इस रास्ते पर चलते हुए अगर बिना दूसरों को तकलीफ पहुंचाए पीड़ा सहें तो कोई भी पत्थर दिल पिघल सकता है। मैं इस देश की युवा पीढ़ी को, सभी आम नागरिकों को और इस आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने वाले लोगों को बधाई देना चाहता हूं। मैं समझता हूं कि अगर कुछ उपलब्धि हासिल हुई है तो यह हमारी बाज़ुओं की ताकत से नहीं, बल्कि शांति की अपील से हुई है।








 

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