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आईबी अधिकारी की हत्या में दरिंदगी की हदें पार, शरीर पर मिले 51 चोट के निशान, मृत्युदंड की मांग

2020 में दिल्ली दंगों के दौरान बेरहमी से कत्ल किए गए आईबी अधिकारी के कातिलों के लिए फांसी की सजा की मांग की गई है। दोषियों की सजा पर सोमवार ...


2020 में दिल्ली दंगों के दौरान बेरहमी से कत्ल किए गए आईबी अधिकारी के कातिलों के लिए फांसी की सजा की मांग की गई है। दोषियों की सजा पर सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने कहा कि जिस तरह से दोषियों ने अंकित की हत्या को अंजाम दिया था वह किसी मानव का काम नहीं हो सकता। इतनी बर्बरता दिखाई कि शव पर अंडरवियर के अलावा कुछ नहीं था। दोषियों को कोर्ट से मृत्युदंड देने की मांग की है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सजा सुनाने के लिए 31 जुलाई का दिन तय किया है।

🔍 ताहिर हुसैन समेत पांच दोषी करार, शरीर पर मिले थे 51 चोट के निशान

इस मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषी हैं। ताहिर हुसैन के अलावा अदालत ने जावेद, अनस, कासिम और नाजिम को दोषी करार दिया था, जबकि छह आरोपी बरी कर दिए गए। मधुकर पांडे ने कहा कि दोषियों ने कोर्ट में जो अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर जो हलफनामे दाखिल किए हैं, उसमें सजा कम करने या नरमी बरतने की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति की हत्या के लिए सात गंभीर चोट पर्याप्त होते हैं, लेकिन अंकित के शव पर 51 चोट के निशान पाए गए थे, जो इनकी बर्बरता की मंशा को दर्शाने के लिए बहुत हैं।'

🧑‍⚖️ बचाव पक्ष की दलील: आपराधिक साजिश साबित नहीं, ताहिर हुसैन ने मांगी नरमी

ताहिर हुसैन की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता राजीव मोहन ने कहा कि पूरे केस में ताहिर पर आपराधिक साजिश के तहत कोई दोष साबित नहीं हो पाया। ताहिर को गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बताया गया। उन्होंने कहा, 'घटनास्थल के मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी फिर भी वे दंगा रोकने में विफल रहे तो फिर वहां जब भीड़ की मौजूदगी थी तो ताहिर व अन्य को क्यों गिरफ्तार किया गया और ट्रायल चलाया गया?' राजीव मोहन ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन फैसलों में मृत्युदंड दिया गया उनमें और ताहिर के केस में काफी अंतर है। हुसैन की तरफ से कहा गया, 'जब मैं आईपीसी 120बी यानी आपराधिक साजिश के आरोप से बरी हो चुका हूं तो इसका अर्थ है कि हत्या की कोई मंशा या योजना नहीं थी। मुझे उस भीड़ का हिस्सा होने के लिए दोषी ठहराया गया है जिसने अंकित की हत्या की थी।' बचाव पक्ष ने कोर्ट से ताहिर के लिए सजा में नरमी बरतने की मांग की है।







 

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