क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन हाईजैक हो गया है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जंतर-मंतर और उसके आसपास मौजूद भीड़ के ऐसे वीडियो...
क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन हाईजैक हो गया है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जंतर-मंतर और उसके आसपास मौजूद भीड़ के ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जो इस ओर इशारा कर रहे हैं।
CJP और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की मुख्य मांगें नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ी हैं। इसके विपरीत, जंतर-मंतर से सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो में धार्मिक नारेबाजी, तलवारबाजी करते लोग, बेकाबू होती भीड़ और अलग-अलग राजनीतिक दलों की मौजूदगी दिख रही है। आंदोलन में शामिल कुछ तत्वों द्वारा पुलिस पर हमले भी किए गए हैं। इन घटनाओं के बाद यह सवाल गहरा गया है कि क्या CJP द्वारा शुरू किया गया छात्र आंदोलन अब अपनी मूल दिशा से भटक रहा है।
🔊 जंतर-मंतर पर गूंजे धार्मिक नारे, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि बुधवार रात करीब 10:30 बजे लाउडस्पीकर से विवादित नारे लगाए गए।
इसके कुछ ही क्षण बाद भीड़ के एक हिस्से से "नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर", "जय श्रीराम" और "भारत माता की जय" के नारे गूंजने लगे। कई मिनट तक यह नारेबाजी चलती रही और बड़ी संख्या में मौजूद लोग इस दौरान वीडियो बनाते और नारे लगाते दिखाई दिए।
⚔️ टॉल्सटॉय मार्ग पर निहंग सिखों की तलवारबाजी, कृपाण और भाले लहराए
इसी दौरान जंतर-मंतर से कुछ ही दूरी पर टॉल्सटॉय मार्ग के पास निहंग सिखों का एक समूह तलवार, कृपाण और भाले लेकर खड़ा दिखाई दिया। कुछ लोग खुलेआम हथियार लहराते नजर आए तो कई फोटो खिंचवाते रहे। वहां मौजूद भीड़ का एक हिस्सा तालियां बजाकर उनका समर्थन करता दिखा।
ऐसे माहौल में पहली बार वहां पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह प्रदर्शन मूल रूप से NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधार जैसे छात्र मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था। एक वीडियो में एक युवा निहंग सिख कहता दिखा, "हम शांति से ही लड़ेंगे, लेकिन अगर हमारी बहन-बेटियों की बात आएगी तो किसी को नहीं छोड़ेंगे..."
🚶♂️ 'संसद चलो' मार्च के बाद तेजी से बदले हालात और बढ़ी बेकाबू भीड़
20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद आंदोलन का स्वरूप तेजी से बदला। लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोपों के बाद हजारों नए लोग जंतर-मंतर पहुंचने लगे।
इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी थी जो पहले इस आंदोलन का हिस्सा नहीं थे। इससे भीड़ का आकार तो बढ़ा, लेकिन साथ ही इसे नियंत्रित करना भी आयोजकों के लिए कठिन होता गया।
⛺ वांगचुक के अनशन से आंदोलन को मिली थी एक स्पष्ट दिशा
आंदोलन की शुरुआत से जुड़े लोग बताते हैं कि शुरुआती दिनों में भीड़ काफी बिखरी हुई थी। बाद में जब शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पहुंचे और उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तब इस आंदोलन को एक सर्वमान्य पहचान और नेतृत्व मिला।
जब तक वांगचुक मुख्य मंच पर रहे, तब तक चर्चा का केंद्र केवल परीक्षा सुधार, पेपर लीक और छात्रों का भविष्य ही रहा। डॉक्टर उनकी सेहत की निगरानी कर रहे थे और देशभर से छात्र उनसे मिलने पहुंच रहे थे।
🏥 वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद बिखरने लगा नेतृत्व
हालांकि, स्वास्थ्य बिगड़ने पर जब सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, तो स्थिति बदलती दिखाई देने लगी। मुख्य मंच से आगे बढ़ते ही अब कई छोटे-छोटे समूह अपने-अपने एजेंडे के साथ दिखाई देते हैं।
कहीं शिक्षा सुधार की बात होती है तो कहीं धर्म, क्षेत्रीय राजनीति और अन्य मुद्दों पर बहस छिड़ी रहती है। कई लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने स्वीकार किया कि वे केवल इतना बड़ा आंदोलन देखने के लिए वहां पहुंचे हैं।
🚔 कनॉट प्लेस में पुलिस-प्रदर्शनकारी झड़प, सेना के पूर्व अधिकारी ने जताई चिंता
बुधवार रात कनॉट प्लेस में भी एक बड़ा जुलूस निकला, जिसके बारे में पहले से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, पथराव और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं। पहले जहां CJP के वॉलिंटियर्स व्यवस्था संभालते थे, वहीं अब कई गुट अपने स्तर पर सक्रिय दिख रहे हैं।
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने भी सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए कहा कि जब किसी शांतिपूर्ण और मुद्दा आधारित आंदोलन में संवाद और स्पष्ट नेतृत्व कमजोर पड़ता है, तो बाहरी और असामाजिक तत्व उसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
🎓 मूल मुद्दा अभी गायब नहीं, लेकिन CJP के सामने बड़ी चुनौती
इन तमाम विवादों के बीच आंदोलन के मूल मुद्दे पूरी तरह गायब नहीं हुए हैं। अब भी बड़ी संख्या में छात्र जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं और मंच से परीक्षा सुधार व पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग उठाई जा रही है।
लेकिन इन जायज मांगों के बीच अब कई अन्य एजेंडे भी समानांतर रूप से चलने लगे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CJP अपने इस आंदोलन की मूल दिशा और उद्देश्य को बनाए रख पाएगी, या फिर यह आंदोलन अलग-अलग समूहों के बीच अपनी पहचान खो देगा।

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