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Sambit Patra Press Conference: बीजेपी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, कहा- विपक्ष राहुल को लॉन्च करने के लिए फैला रहा अराजकता

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ मंगलवार को 'इंडिया ब्लॉक' द्वारा संसद भवन से ECI मुख...

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ मंगलवार को 'इंडिया ब्लॉक' द्वारा संसद भवन से ECI मुख्यालय तक निकाले जा रहे मार्च पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा पलटवार किया है। बीजेपी ने विपक्षी दलों पर देश में अराजकता का माहौल पैदा करने और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ तौर पर कहा कि विपक्ष का यह पूरा हंगामा केवल राहुल गांधी को राजनीति में लॉन्च और री-लॉन्च करने की एक प्रायोजित कोशिश है।

🎯 'संवैधानिक संस्थाओं पर प्रायोजित हमले कर रही कांग्रेस': राहुल गांधी पर जनता को गुमराह करने और झूठ फैलाने का आरोप

संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी को सत्ता में स्थापित करने का यह प्रयास नया नहीं है, बल्कि पिछले कई सालों से कांग्रेस इसके लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बार-बार की कोशिशों के बाद भी राहुल गांधी लॉन्च नहीं हो पाए, तो कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना ही अपना रास्ता चुन लिया। फॉर्म 6 पर दायर जनहित याचिका और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए पात्रा ने कहा कि राहुल जनता को लगातार गुमराह कर रहे हैं और सरासर झूठ बोल रहे हैं।

📜 फॉर्म 6 और सर्वसम्मति के मुद्दों पर चुनाव आयोग का दिया हवाला: पात्रा ने कहा- अदालत ने फॉर्म को अवैध नहीं ठहराया, सब कुछ स्पष्ट है

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने राहुल गांधी के दावों को खारिज करते हुए दो मुख्य बिंदुओं पर सफाई दी। पहला, उन्होंने कहा कि राहुल का यह दावा पूरी तरह गलत है कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 को अवैध घोषित कर दिया है, जबकि अदालत ने केवल याचिका में उठाए गए बिंदुओं पर नोटिस जारी कर जांच की बात कही है और चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि फॉर्म में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दूसरा, चुनाव आयुक्तों में मतभेद के दावे को खारिज करते हुए पात्रा ने ईसीआई की तथ्य-जांच का हवाला दिया और कहा कि बिहार में SIR संबंधी आदेश पूरी तरह सर्वसम्मति से जारी किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है।






 

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