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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में छोटे बच्चों की स्वास्थ्य जाँच को लेकर हाल ही में बेहद चौकाने वाले और महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत चलाई जा रही स्क्रीनिंग के दौरान कुल 4,620 बच्चे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से 4,460 बच्चों का समय पर उपचार कराया जा चुका है, जबकि शेष 160 बच्चे अभी भी इलाज की प्रक्रिया और इंतजार में हैं। इसके अलावा, जिले में जन्मजात पैर टेढ़े (क्लब फुट) होने वाले 27 बच्चों समेत कई अन्य गंभीर समस्याओं से पीड़ित बच्चों को भी विशेष रूप से चिह्नित किया गया है।
📊 99 फीसदी से अधिक पूरा हुआ स्क्रीनिंग का लक्ष्य: मार्च से अगस्त 2026 तक 95 हजार से अधिक बच्चों की हुई जाँच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर साल अक्टूबर के पहले सोमवार को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य दिवस के अंतर्गत प्रदेश सरकार बच्चों के स्वास्थ्य की सतत निगरानी कर रही है। आरबीएसके के तहत स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सघन स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। मार्च से अगस्त 2026 तक जिले में कुल 95,576 बच्चों की स्वास्थ्य जाँच की जा चुकी है, जिसमें जन्मजात दोष, पोषण तत्वों की कमी, विभिन्न बीमारियाँ और दिव्यांगता शामिल हैं। जिले में बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए 96,377 का कुल लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 99.17 फीसदी यानी 95,576 बच्चों की जाँच सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। नोडल अधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों की स्क्रीनिंग के साथ उनके त्वरित इलाज की पुख्ता व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
🧬 जन्मजात दोषों के मामलों का खुलासा: क्लब फुट, दिल में छेद और अन्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों का विवरण
गाजियाबाद जिले में अगस्त 2026 तक जन्मजात दोषों के कुल 64 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 47 बच्चों का उपचार सफलतापर्वक किया जा चुका है, जबकि 17 बच्चों का इलाज अभी प्रक्रिया में है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार:
क्लब फुट (पैर टेढ़े होना): कुल 27 मामले, जिनमें से 23 का इलाज हो चुका है और 4 प्रक्रिया में हैं।
दिल में छेद: कुल 17 मामले, जिनमें 12 का उपचार हो चुका है और 5 प्रक्रियाधीन हैं।
कटे होंठ या तालू: कुल 12 मामले, जिनमें 4 का उपचार हुआ और 8 प्रक्रिया में हैं।
न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट: कुल 3 मामले, और तीनों का उपचार संपन्न हो चुका है।
जन्मजात मोतियाबिंद: 1 मामला सामने आया, जिसका उपचार किया जा चुका है।
जन्मजात बहरापन: कुल 4 मामले दर्ज किए गए और सभी 4 बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया है।

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