दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाली अवैध औद्योगिक इकाइयों पर लगाम कसने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ...
📜 गामड़ी गांव के मामले में आया NGT का आदेश: मुआयना करने से पहले नोटिस देना जरूरी नहीं, पुलिस और DISCOM भी शामिल
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गामड़ी गांव में याचिकाकर्ता वरुण गुलाटी द्वारा दायर मामले पर यह फैसला सुनाया। याचिका में बिना अनुमति चल रही मेटल ट्रीटमेंट, निकेल इलेक्ट्रोप्लेटिंग, कांच पिघलाने और कपड़ों की रंगाई जैसी जहरीला प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की शिकायत की गई थी। एनजीटी ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 का हवाला देते हुए साफ किया कि निरीक्षण के लिए पहले से नोटिस देना अनिवार्य नहीं है। निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) के प्रतिनिधि को भी संयुक्त जांच टीम में शामिल करने की मंजूरी दी गई है।
🌊 यमुना को बचाने के लिए MCD का बड़ा एक्शन: पुरानी दिल्ली में 3 अवैध धोबी घाट सील, कटे बिजली-पानी के कनेक्शन
दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम ने यमुना नदी को दूषित होने से बचाने के लिए पुरानी दिल्ली में बिना अपशिष्ट जल शोधन (Effluent Treatment) के चल रहे 3 अनाधिकृत धोबी घाटों को सील कर दिया है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ये इकाइयां बिना DPCC अनुमति के चल रही थीं और BIS मानकों के विपरीत घटिया डिटर्जेंट व केमिकल्स का इस्तेमाल कर रही थीं। निगम आयुक्त संजीव खिरवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यमुना की सफाई प्राथमिक लक्ष्य है और नियमों का उल्लंघन करने वाली सभी इकाइयों के बिजली-पानी के कनेक्शन काटकर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

कोई टिप्पणी नहीं