दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग...
दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग करने वाली तमाम याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत में कुल 15 याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें कई प्रमुख नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई गई थी। कोर्ट के इस निर्णय से याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है।
⚖️ किन नेताओं के खिलाफ की गई थी मांग? अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा का था नाम
शेख मुज्तबा फारूक और अन्य की ओर से दायर इन याचिकाओं में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
🔍 जामिया मिलिया इस्लामिया में पुलिस बर्बरता की SIT जांच की मांग भी ठुकरा दी गई
इसके अलावा, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने साल 2019 के सीएए-विरोधी (CAA-Anti) प्रदर्शनों के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई पुलिस कार्रवाई और कथित बर्बरता की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है। अदालत के इस दोहरे फैसले से जुड़े मामलों में फिलहाल कानूनी प्रक्रिया का यह दौर समाप्त हो गया है।

कोई टिप्पणी नहीं