राजधानी दिल्ली के आधुनिक प्रशासनिक ढांचे को संवारने में अहम भूमिका निभाने वाले शीला दीक्षित सरकार के बेहद करीबी और दिल्ली के पूर्व मुख्य सचि...
राजधानी दिल्ली के आधुनिक प्रशासनिक ढांचे को संवारने में अहम भूमिका निभाने वाले शीला दीक्षित सरकार के बेहद करीबी और दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता (75) का निधन हो गया है. 1975 बैच के इस तेजतर्रार रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ने नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी के अपने किराए के फ्लैट में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. मौके से मिले एक पन्ने के सुसाइड नोट में उन्होंने गंभीर बीमारियों और मानसिक तनाव को इसका कारण बताया है.
🏗️ 2. दिल्ली को लो-फ्लोर बसें, ब्लू लाइन से मुक्ति और यूनिट एरिया टैक्स सिस्टम देने वाले 'संकटमोचक' थे राकेश मेहता
मूल रूप से उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले राकेश मेहता ने सेंट स्टीफंस, जेएनयू और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी. अपने तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने दिल्ली के विकास में क्रांतिकारी कदम उठाए. दिल्ली की सड़कों से 'खूनी नीली बसें' हटाकर आधुनिक डीटीसी बसें लाना, बिजली क्षेत्र का निजीकरण करना, एमसीबी में संपत्ति कर के लिए 'यूनिट एरिया सिस्टम' लागू करना और 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) का सफल प्रबंधन उनके सबसे बड़े प्रशासनिक कार्य माने जाते हैं.
😔 3. शानदार करियर के बाद भी अंतिम दौर में एकाकी जीवन जी रहे थे पूर्व आईएएस, पत्नी से फोन पर हुई थी आखिरी बात
सेवानिवृत्ति के बाद पिछले पांच सालों से राकेश मेहता नोएडा के फ्लैट में अकेले रह रहे थे, जबकि उनकी पत्नी सुमति मेहता (जो खुद रिटायर्ड आईएएस हैं) और बेटा देहरादून में रहते थे. रविवार को जब पत्नी के फोन का जवाब नहीं मिला तो गार्ड को भेजने पर घटना का पता चला. सोमवार को लोधी रोड श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दुखद अंत ने नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों को गहरे सदमे में डाल दिया है.

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