इसी साल अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल भेजी गई सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इल...
इसी साल अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जेल भेजी गई सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी हिरासत को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है और 5 महीने तक जेल में रखने के एवज में उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। सरकार की ओर से हिंसा भड़काने के पुख्ता सबूत पेश न किए जाने पर कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है।
🏛️ 2. कोर्ट ने मामले को बताया मनगढ़ंत, डीएम मेधा रूपम को दिया 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच ने इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए इसे मनगढ़ंत करार दिया और आकृति चौधरी को तत्काल प्रभाव से जेल से रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, नोएडा की डीएम मेधा रूपम को निर्देश दिए गए हैं कि वे आकृति को 5 महीने जेल में रखने के हर्जाने के रूप में 5 लाख रुपये का मुआवजा दें। सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने सरकार से हिंसा में शामिल होने के सबूत मांगे, तो सरकार पक्ष की ओर से कोई ठोस दस्तावेज या वीडियो पेश नहीं किया जा सका।
🛑 3. वकीलों की दलील- हिंसा के दिन पहले से ही पुलिस हिरासत में थीं आकृति, सरकार नहीं जुटा पाई सबूत
यह पूरा मामला इसी साल 10 से 18 अप्रैल के बीच नोएडा में मजदूरों द्वारा वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन और 13 अप्रैल को हुई हिंसा से जुड़ा है। राज्य सरकार ने एक महीने बाद आकृति पर एनएसए लगाते हुए इलेक्ट्रॉनिक और वीडियोग्राफी के सबूत होने का दावा किया था। हालांकि, आकृति के वकील ने अदालत में साबित किया कि घटना के दिन वह पहले से ही पुलिस हिरासत में थीं, जिसके चलते हिंसा में शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट ने सरकार को समय देने से इनकार करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

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