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Karni Sena Jantar Mantar Protest Plea: यूजीसी नियमों और आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सामान्य प्रक्रिया से होगी सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को क्षत्रिय करणी सेना को बड़ा झटका देते हुए उसकी उस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें द...

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को क्षत्रिय करणी सेना को बड़ा झटका देते हुए उसकी उस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित संगठन के विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर दिया गया था. करणी सेना आरक्षण नीतियों और यूजीसी (UGC) के नए नियमों के खिलाफ जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन करना चाहती है.

🏛️ 2. चीफ जस्टिस की बेंच ने याचिका सामान्य प्रक्रिया से दायर करने को कहा, राज शेखावत ने दायर की है याचिका

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने मामले को तुरंत लिस्ट करने की याचिकाकर्ता की मांग को ठुकराते हुए इसे सामान्य प्रक्रिया के तहत दायर करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. यह याचिका करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत द्वारा दायर की गई है, जो 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांग रहे हैं.

🛡️ 3. ब्रिक्स (BRICS) समिट-2026 की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने खारिज किया था आवेदन

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 28 अगस्त को सुरक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक चिंताओं और ब्रिक्स समिट-2026 की तैयारियों का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति का आवेदन खारिज कर दिया था. हालांकि याचिकाकर्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि जंतर-मंतर से किसी भी सुरक्षा रूट या भारत मंडपम की ओर जुलूस नहीं निकाला जाएगा, लेकिन पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुमति देने से मना कर दिया था.

📚 4. आरक्षण नीतियों और यूजीसी (UGC) रेगुलेशंस, 2026 के विरोध में है प्रदर्शन का पूरा प्रस्ताव

क्षत्रिय करणी सेना 20 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहती है. इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का मुख्य मकसद आरक्षण नीतियों और हाल ही में नोटिफाई किए गए यूजीसी (हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में इक्विटी को बढ़ावा देने वाले) रेगुलेशंस, 2026 को लेकर अपनी चिंताएं जताना और इन नियमों को वापस लेने की मांग करना है.







 

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