राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को दिल्ली के चारों तरफ एक विशाल औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स रिंग के रूप में विकसित करने की बड़ी तैयारी की जा ...
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) को दिल्ली के चारों तरफ एक विशाल औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स रिंग के रूप में विकसित करने की बड़ी तैयारी की जा रही है. प्रस्तावित 'एनसीआर रीजनल प्लान-2041' के तहत सेंट्रल एनसीआर में आधुनिक वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क, ड्राई पोर्ट, इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), एयर-कार्गो टर्मिनल और मल्टीमॉडल फ्रेट हब का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया जाएगा. इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र गुरुग्राम को बनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विनिर्माण, भंडारण, माल ढुलाई, एक्सप्रेसवे और फ्रेट रेल कॉरिडोर को एक मजबूत आर्थिक तंत्र में जोड़ना है.
📦 2. नीतिगत बदलाव से घटेगी जमीन की लागत, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और नांगल चौधरी हब से बढ़ेगी रफ्तार
योजना के तहत एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स भूमि उपयोग श्रेणी को 'औद्योगिक गतिविधि' का दर्जा देने का प्रस्ताव है, जिससे जमीन की लागत कम होगी और माल ढुलाई वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगी. बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर जेवर से दादरी तक 1,506 किमी लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर चालू हो चुका है, जिस पर रोजाना सैकड़ों मालगाड़ियां दौड़ रही हैं. इसके अलावा, महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी में 886 एकड़ में विकसित एकीकृत मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है.
✈️ 3. गुरुग्राम-मानेसर-बावल बेल्ट होगी सबसे अहम, नोएडा एयरपोर्ट का कार्गो हब संभालेगा सालाना 2.5 लाख टन माल
इस पूरे मास्टर प्लान में गुरुग्राम-मानेसर-बावल बेल्ट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी, जहां झज्जर, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जैसे जिलों को प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जाएगा. वहीं, हवाई मार्ग से माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के मल्टीमॉडल कार्गो हब को भी इस नेटवर्क का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है, जो शुरुआती दौर में सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो संभालेगा और दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद व गुरुग्राम को विशेष कॉरिडोर से जोड़ेगा.

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