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Delhi High Court on Police Arrests: पुलिस आरोपियों को चुन-चुनकर गिरफ्तार नहीं कर सकती, दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी भी मामले में आरोपियों को चुन-चुनकर गिरफ्तार नहीं क...

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि पुलिस किसी भी मामले में आरोपियों को चुन-चुनकर गिरफ्तार नहीं कर सकती है। अदालत ने नसीहत देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के मामले में 'पिक-एंड-चूज' (अपनी मर्जी से चुनने) के रवैये को पूरी तरह गलत माना जाना चाहिए। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस को यह साफ तौर पर बताना चाहिए कि वह किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना चाहती है या नहीं, और इस प्रकार की मनमानी कार्रवाई की निंदा की जानी चाहिए।

🔍 2. बच्चों की तस्करी के मामले में सुनवाई के दौरान सामने आया मामला, मुख्य आरोपी को नहीं पकड़ने पर कोर्ट ने उठाए सवाल

अदालत ने यह सख्त टिप्पणी बच्चों की तस्करी के एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। आरोपी को दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2024 में आईपीसी की धारा 370 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 81 के तहत दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तार किया था। आरोपी के वकील ने दलील दी कि उसे झूठा फंसाया गया है क्योंकि पुलिस ने अब तक इस मामले के असली और कथित मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिस पर जांच अधिकारी ने भी मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई न होने की बात स्वीकार की।

👶 3. हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार, लेकिन तस्करी की शिकार बच्ची को न ढूंढ पाने पर पुलिस की खिंचाई

लगातार ढाई साल से हिरासत में होने का हवाला देने वाले आरोपी की जमानत याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने आखिरकार खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने जांच के स्तर पर भारी लाचारी दिखाने के लिए पुलिस की कड़ी आलोचना की क्योंकि पुलिस अब तक तस्करी की शिकार बनाई गई उस बच्ची को बरामद या रेस्क्यू नहीं कर पाई है। कोर्ट ने संबंधित डीसीपी (DCP) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द बच्ची को तलाश करें और चार हफ्ते के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करें।







 

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