दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में संविदा पर काम करने वाले करीब दो हजार सीवर कर्मचार...
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में संविदा पर काम करने वाले करीब दो हजार सीवर कर्मचारियों को नियमित करने और काम के दौरान जान गंवाने वाले सेप्टिक टैंक कर्मचारियों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा व सरकारी नौकरी देने की मांग की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
⚠️ 2. न्यूनतम वेतन से भी कम पर खतरनाक काम करने को मजबूर कर्मचारी, याचिका में हालात को बताया बंधुआ मजदूरों से भी बदतर
'दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच' द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि दिल्ली जल बोर्ड में हजारों सीवर कर्मचारी बेहद कम वेतन पर और खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं। ये कर्मचारी समाज के सबसे पिछड़े वर्गों से आते हैं, जिनकी नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं है और उन्हें पीएफ, ग्रेच्युटी या बोनस जैसे कानूनी लाभ भी नहीं मिलते। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इनके काम करने की हालत गुलाम या बंधुआ मजदूरों से भी बदतर है।
📉 3. पिछले 10 वर्षों में गई 300 सीवर कर्मियों की जान, 20 नवंबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
याचिका में आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पिछले 10 सालों में दिल्ली में काम के दौरान करीब 300 सीवर कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, फिर भी कामकाजी परिस्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ है। यह याचिका उन 2,000 कर्मचारियों के लिए है जो डीजेबी में 10 से 25 साल से बेदाग रिकॉर्ड के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर तय की है।

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