दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले यानी जनवरी 2025 से लेकर जून 2026 के बीच के 16 महीनों में लगभग 11 ...
दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले यानी जनवरी 2025 से लेकर जून 2026 के बीच के 16 महीनों में लगभग 11 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं। दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, इतने बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के पीछे मुख्य वजहें नियमित तिमाही रोल संशोधन और बूथ-लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा की गई गलतियां हैं। दिल्ली में SIR का यह चरण 30 जून को शुरू हुआ था, जिसके पहले चरण में लगभग 48 लाख नाम वोटर लिस्ट से कम हो चुके हैं।
🔍 2. मतदाताओं को नहीं थी नाम कटने की भनक, मुबारकपुर डबास की पूजा देवी समेत कई लोगों को नए सिरे से भरना होगा फॉर्म 6
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के कई ऐसे मतदाता सामने आए हैं जिन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि पिछले 16 महीनों के दौरान उनका नाम सूची से बाहर कर दिया गया है। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मुबारकपुर डबास की रहने वाली घरेलू कामगार पूजा देवी ने बताया कि उन्होंने पिछले चुनावों में मतदान किया था, लेकिन इस बार SIR फॉर्म न मिलने पर जब वह BLO के पास गईं तो पता चला कि उनका नाम लिस्ट में ही नहीं है। उन्हें अब नए सिरे से रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म 6 भरना होगा। आंकड़ों के मुताबिक, काटे गए 11 लाख नामों में से करीब 3 लाख नाम अकेले मई और जून 2026 के बीच प्री-SIR मैपिंग के दौरान हटाए गए थे।
🏛️ 3. चुनाव आयोग के आंकड़ों और सीईओ कार्यालय की सफाई, कहा- नियमित संशोधन प्रक्रिया के तहत लगातार होते हैं बदलाव
दिल्ली चुनाव कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि हालांकि यह संख्या बड़ी है, लेकिन यह नाम नियमित तिमाही संशोधनों के दौरान हटाए गए होंगे। जानकारों का कहना है कि वोटर लिस्ट को फ्रीज न किए जाने पर फॉर्म 6 के जरिए नाम जोड़ने और फॉर्म 7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार नाम हटने की यह रफ्तार काफी असामान्य रही है, जिससे नागरिकों को जागरूक होकर अपनी वोटर लिस्ट की स्थिति समय-समय पर जांचने की जरूरत है।

कोई टिप्पणी नहीं