प्रसिद्ध शिक्षक और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बीते 23-24 जुलाई की दरमियानी रात बीजेपी नेता जेपी नड्डा के हाथों जूस पीकर अपनी 26 दिन...
प्रसिद्ध शिक्षक और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बीते 23-24 जुलाई की दरमियानी रात बीजेपी नेता जेपी नड्डा के हाथों जूस पीकर अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त की थी। हालांकि, इस आंदोलन के दौरान उठी प्रमुख मांगों में से एक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उस समय पूरी नहीं हो पाई थी। अब एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान सोनम वांगचुक ने खुलकर बताया है कि आखिर उन्होंने उस समय इस्तीफे की मांग को पीछे क्यों किया और उनके सामने सबसे बड़ा डर क्या था।
⚠️ 2. दिल्ली में बढ़ रही हिंसा और सिविल वॉर जैसे हालात का था सबसे बड़ा डर: सोनम वांगचुक
'प्रखर गुप्ता एक्सपीरियंस' पॉडकास्ट पर बातचीत करते हुए सोनम वांगचुक ने खुलासा किया कि 21 जुलाई के बाद उन्होंने इस्तीफे की मांग को प्राथमिकता से हटा दिया था। उन्होंने बताया कि उस समय कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में बहुत ज्यादा हिंसा हो रही थी, मेट्रो के शीशे तोड़े जा रहे थे और भारी पुलिस बल तैनात था। उन्हें डर था कि अगर यह स्थिति नियंत्रित नहीं हुई, तो दिल्ली में भी सिविल वॉर जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
⚖️ 3. इस्तीफे से ज्यादा जरूरी था 'लीगल हरेसमेंट' रोकना, सरकार से लिखित आश्वासन के बाद बनी बात
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य फोकस इस बात पर था कि कार्यकर्ताओं या आंदोलनकारियों को किसी तरह का 'लीगल हरेसमेंट' (कानूनी प्रताड़ना) न झेलना पड़े। शुरुआत में सरकार लिखित आश्वासन देने को तैयार नहीं थी, लेकिन जब 23 जुलाई की रात सरकार ने लिखित रूप से भरोसा देने की हामी भरी और बिगड़ते हालात को देखते हुए उन्होंने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।

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