नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हाल ही में 23 दिनों तक अनशन पर बैठने वाली ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने ए...
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हाल ही में 23 दिनों तक अनशन पर बैठने वाली ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। नेहा ने प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकार के खिलाफ की गई तीखी आलोचना या अमर्यादित भाषा की निंदा करने से साफ इनकार कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस भाषा विवाद को तूल देकर 20 जुलाई के 'संसद मार्च' के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के मुख्य मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। नेहा के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों के बयानों को मुद्दा बनाकर सरकार पुलिस एक्शन को लेकर अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
⚖️ 15 वर्षीय रुचिका सिंह पर एफआईआर का मामला: नेहा बोरा ने मंत्रियों के बयानों पर उठाए सवाल
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों की भाषा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में 15 वर्षीय प्रदर्शनकारी रुचिका सिंह के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्र नेता नेहा बोरा ने कहा:
"आपको अपशब्दों का इस्तेमाल इतना बुरा लग रहा है, लेकिन आप तब कहां थे जब केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को 'आतंकवादी' कहा था? क्या तब किसी ने एफआईआर दर्ज कराई? जब नितिन नबीन ने हमें 'वायरस' कहा था, तब क्या किसी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ?"
नेहा का कहना है कि इस समय चर्चा भाषा की नहीं, बल्कि पुलिस की बर्बरता में घायल हुए छात्रों की होनी चाहिए।
❓ "20 जुलाई को पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल क्यों?": नेहा बोरा ने मांगे सीधे जवाब
सरकार और पुलिस प्रशासन से तीखे सवाल पूछते हुए नेहा बोरा ने कहा, "जो लोग चाहते हैं कि हम माफी मांगें या अपमान की निंदा करें, वे समझ लें कि हम इस राजनीतिक खेल में शामिल नहीं होंगे। आप यह नैरेटिव इसलिए गढ़ रहे हैं क्योंकि हम गृह मंत्री अमित शाह और पुलिस कमिश्नर से सीधी जवाबदेही मांग रहे हैं। आपको लगता है कि छात्रों पर पैलेट गन चलाना छोटा मुद्दा है और किसी बयान पर विवाद बड़ा मुद्दा है?"
उन्होंने सवाल उठाया कि 20 जुलाई को सुरक्षाकर्मियों को पैलेट गन और कील लगी लाठियां इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों दी गई थी, इसका जवाब सरकार को देश के सामने देना चाहिए।
🛡️ सोशल मीडिया पर रेप की धमकियां और आंदोलन को बांटने का आरोप
छात्र नेता ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों की जांच क्यों नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि जब संसद में अपमानजनक टिप्पणी होती है या कोई विचारक प्रदर्शनकारी लड़कियों को लेकर आपत्तिजनक बातें कहता है, तब कोई कार्रवाई नहीं होती।
नेहा बोरा ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि विवाद के बाद उन्हें और रुचिका सिंह को सोशल मीडिया पर रेप की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रदर्शनकारियों को जाति, धर्म और लिंग के आधार पर बांटने की कोशिश की जा रही है। मुद्दा यह नहीं है कि किसने कौन सा शब्द कहा, बल्कि मुद्दा यह है कि क्या लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस और पैलेट गन का हमला जायज है।
👮♂️ 20 जुलाई का लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की पूरी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 20 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद मार्च निकाला गया था। मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई छात्र घायल हुए थे।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पैलेट गन का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन चलाने के आरोपों को खारिज किया है, जबकि गृह मंत्रालय (MHA) का कहना है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की थी।

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