दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में लंबे समय से संविदा या अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत शिक्षकों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ...
दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में लंबे समय से संविदा या अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत शिक्षकों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) से एक बहुत बड़ी राहत मिली है। कैट ने चार महिला अभ्यर्थियों को आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान करते हुए योग्यता के आधार पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) के पद पर दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले का दायरा बढ़ने से निगम के अन्य कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स को भी इसका सीधा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
👩🏫 2. कई वर्षों से दे रहे थे सेवाएं, अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष पार करने के कारण आ रही थी बाधा
न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य डॉ. आनंद एस. खाती की बेंच ने पिंकी मौर्य एवं अन्य बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) के मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। यह पूरा मामला उन कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स से जुड़ा है जो वर्षों से एमसीडी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन डीएसएसएसबी की नियमित भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा (30 वर्ष) पार कर चुके थे। बेंच ने माना कि इन शिक्षकों का लंबा अनुभव और उनकी योग्यता को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
📋 3. कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने वाली चार महिला अभ्यर्थियों के पक्ष में आया फैसला, सीलबंद लिफाफे में पेश हुए थे नतीजे
अंतरिम आदेश के तहत इन अभ्यर्थियों को पहले भर्ती प्रक्रिया में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी गई थी, और बाद में उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे में बेंच के समक्ष रखे गए थे। परिणामों की गहन जांच के बाद यह पाया गया कि पिंकी मौर्य, अंजू बाला, सरोज बाला और सविता कुमारी मान ने निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल किए हैं। इसके बाद कैट ने उनके आवेदन स्वीकार करते हुए अधिकारियों को आयु में छूट देने और सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति पर विचार करने को कहा।
🏛️ 4. सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला, फैसले से निगम के करीब दो हजार संविदा शिक्षकों को मिलेगा फायदा
कैट के इस फैसले से एमसीडी में लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे करीब 2099 शिक्षकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने ऐतिहासिक निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को भी आयु में छूट के उद्देश्य से नियमित कर्मचारी माना गया था। कैट ने स्पष्ट किया कि यदि विज्ञापन में कोई लाभ केवल स्थायी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, तो संविदा कर्मियों को उससे वंचित नहीं किया जा सकता।

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