झांसी: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान की भीषण सड़क हादसे में दर्दनाक मौत की खबर ने झांसी जेल में बंद उसके बड़े भाई अली अहमद को अ...
झांसी: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान की भीषण सड़क हादसे में दर्दनाक मौत की खबर ने झांसी जेल में बंद उसके बड़े भाई अली अहमद को अंदर तक झकझोर दिया है।
छोटे भाई के गुजर जाने की सूचना मिलते ही अली रोने लगा और रोते-रोते बेसुध हो गया। वह बार-बार बस यही दोहराता रहा— "अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया..." इस दर्दनाक हादसे के बाद से अली गहरे सदमे में है। उसने पिछले दो दिनों से न तो खाना खाया है और न ही एक पल के लिए सोया है।
📞 "मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई": आबान के आखिरी 10 शब्द, हाईवे पर क्रेटा कार 7 फीट उछली
"मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई"—ये 10 शब्द आबान के थे, जो उसने झांसी जेल पहुंचने से ठीक पहले एक दरोगा को फोन पर कहे थे।
लेकिन इसके कुछ ही मिनटों बाद पूंछ थाना क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग (Highway) पर छुट्टा जानवर को बचाने के चक्कर में उसकी तेज रफ्तार क्रेटा कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार हवा में 7 फीट उछल गई और आबान की मौके पर ही मौत हो गई। जब जेल अधिकारियों ने अली को हादसे की जानकारी दी तो उसकी चीख निकल गई। रोज सुबह कसरत करने वाला अली खुद को कोठरी में बंद किए रातभर करवटें बदल-बदलकर रोता रहा।
📚 हर मुलाकात पर लाता था किताबें: मलबे से बरामद हुईं दो नॉवेल, गले लगकर रोते थे दोनों भाई
जेल सूत्रों के अनुसार, अली अपने सबसे छोटे भाई आबान को बेइंतहा प्यार करता था:
हर महीने मुलाकात: आबान भी हर महीने 3 से 4 बार उससे मिलने झांसी जेल आता था। मुलाकात के दौरान दोनों भाई काफी देर तक एक-दूसरे से गले मिले रहते थे।
किताबों का शौक: आबान जब भी आता, अपने भाई के पढ़ने के लिए नॉवेल और किताबें साथ लाता था।
मलबे से मिलीं पुस्तकें: दुर्घटनाग्रस्त कार के मलबे से भी पुलिस को दो किताबें— ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ और ‘द इडियट’ बरामद हुई हैं, जिन्हें वह अली को जेल में देने जा रहा था।
⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी सशर्त पैरोल: कसारी-मसारी कब्रिस्तान में जनाजे में शामिल होंगे अली और उमर
छोटे भाई के जनाजे (अंतिम संस्कार) में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद बड़े भाई उमर ने हाईकोर्ट में अर्जेंट अर्जी दाखिल की थी:
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों भाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े। अली ने रोते हुए जज से प्रार्थना की कि उसे भाई के जनाजे में शामिल होने दिया जाए।
सख्त शर्तें: हाईकोर्ट की पीठ (जस्टिस अजय भनोट व डीसी सामंत) ने सख्त शर्तों के साथ दोनों भाइयों को पैरोल दे दी है।
कड़ी सुरक्षा: कोर्ट के आदेशानुसार, अली और उमर को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच सीधे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाएगा, जहां वे केवल एक घंटे रुककर अंतिम क्रियाक्रम में शामिल हो सकेंगे। इसके बाद दोनों को तुरंत वापस संबंधित जेलों में भेज दिया जाएगा।

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