नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आमतौर पर राजनीतिक मंचों पर बेहद गंभीर और तल्ख तेवरों में नजर आते हैं, ल...
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आमतौर पर राजनीतिक मंचों पर बेहद गंभीर और तल्ख तेवरों में नजर आते हैं, लेकिन हाल ही में मजाकिया लहजे में हुए एक खास इंटरव्यू में उनका बिल्कुल अलग ही अंदाज देखने को मिला। इन दिनों 'जेन-जी' (Gen Z) युवाओं से खुद को जोड़ने की कोशिश कर रहे केजरीवाल ने खुद को लेकर इंटरनेट पर वायरल बने कई मीम्स पर बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उनसे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के भाजपा में जाने से जुड़े वायरल मीम्स पर भी तीखे और चुटीले सवाल पूछे गए।
दरअसल, कुछ समय पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने छह अन्य सांसदों के साथ 'आप' से अलग होकर भाजपा के साथ विलय कर लिया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम पर इंटरनेट पर एक मीम काफी तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें मजाकिया लहजे में पूछा गया था कि— "क्या अरविंद केजरीवाल ने जानबूझकर राघव चड्ढा को जासूस बनाकर बीजेपी में प्लांट किया है?" जब पूर्व मुख्यमंत्री को यह मीम दिखाया गया, तो उन्होंने पहले थोड़ा गंभीर चेहरा बनाया और फिर खिलखिलाकर हंसते हुए कहा, "उन्हें यह बात कैसे पता चल गई? यह सीक्रेट बात बाहर कैसे लीक हो गई?"
💔 राघव चड्ढा की बगावत पर बोले केजरीवाल: 'मुझे बिल्कुल आइडिया नहीं था, जहां रहें खुश रहें'
राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने को लेकर अरविंद केजरीवाल ने एक अन्य साक्षात्कार में अपनी वास्तविक भावनाएं भी साझा कीं:
अपेक्षा से परे घटनाक्रम: आप संयोजक ने स्वीकार किया कि पार्टी में जो कुछ भी हुआ, उसकी उन्हें दूर-दूर तक उम्मीद नहीं थी।
दिल की बात: केजरीवाल ने कहा, "मुझे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था, बिल्कुल आइडिया नहीं था। लेकिन अब क्या ही कर सकते हैं, कुछ नहीं किया जा सकता। वे जहां भी गए हैं, खुश रहें। मैं दिल से उम्मीद करता हूं कि वे सातों सांसद जहां भी हैं, खुश रहें।"
🔄 'यू-टर्न' वाले मीम्स पर केजरीवाल की सफाई: अन्ना आंदोलन और कांग्रेस सरकार का बताया सच
अरविंद केजरीवाल ने उन मीम्स का भी खुलकर जवाब दिया जिनमें उनके पुराने बयानों का हवाला देकर उन पर 'यू-टर्न' मारने का ठप्पा लगाया जाता है:
राजनीति में आने पर जवाब: कभी चुनाव न लड़ने और भाजपा-कांग्रेस को समर्थन न देने के पुराने वायरल बयानों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, "अन्ना आंदोलन के दौरान जब सरकार ने हमारी कोई बात नहीं मानी, तो उन्होंने हमें चुनौती दी कि लोकपाल बिल चाहिए तो चुनाव लड़ो, क्योंकि कानून संसद में बनते हैं। मैंने अपनी पहली स्पीच में कहा था कि कभी किसी आम आदमी को चुनौती मत देना।"
49 दिनों की सरकार का तर्क: कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने के फैसले पर उन्होंने कहा, "हम कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाना चाहते थे, लेकिन उन्हें लगा था कि हम अपने वादे पूरे नहीं कर पाएंगे। लेकिन हमने 49 दिनों के भीतर अपने सभी वादे पूरे कर दिखाए। यही मुख्य वजह थी कि उसके एक साल के भीतर दिल्ली की जनता ने हमें 70 में से 67 सीटें देकर ऐतिहासिक बहुमत दिया।"

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