अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने के बाद प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) प...
अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने के बाद प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपना एक वीडियो संदेश साझा किया। इसमें उन्होंने बताया कि अनशन खत्म करने के बाद अपने ऊपर लग रहे 'डील' (सौदेबाज़ी) के आरोपों से वह बेहद परेशान हैं।
उन्होंने थोड़े गम और गुस्से के साथ कहा कि 26 दिनों तक भूखा रहने के बाद भी क्या उन्हें अब अपनी ईमानदारी साबित करने की जरूरत है? उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अपना अनशन नहीं तोड़ना चाहते थे, बल्कि सभी राजनीतिक दलों के सांसदों, CJP के छात्र नेताओं और लद्दाख के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में अनशन समाप्त करना चाहते थे। हालांकि, उनसे किसी को नहीं मिलने दिया गया और सभी को वापस भेज दिया गया। वांगचुक ने इस पूरे मामले को अदालत में ले जाने की बात कही है।
🏥 मेदांता अस्पताल के वार्ड से बाहर निकलने की कोशिश: 'मुझे गिरफ्तार कर लीजिए, मैं आजाद नागरिक हूं'
सोनम वांगचुक द्वारा जारी वीडियो की शुरुआत में उन्होंने बताया, "शारीरिक रूप से लड़-झगड़कर, हड़ताल के अंदर एक और हड़ताल करके, जमीन पर लेटकर, जो थोड़ी-बहुत ताकत 20वें-22वें दिन मेरे अंदर थी, वह पूरी ताकत लगाकर मुझे जबरदस्ती अस्पताल से बाहर निकलना पड़ा।"
वीडियो में एक दिन पहले की वह क्लिप भी सामने आई, जिसमें वांगचुक बेहद गुस्से में मेदांता अस्पताल के अपने वार्ड से बाहर निकलने का प्रयास करते दिख रहे हैं। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारी पर नाराजगी जताते हुए कहा, "उनसे कहिए मुझे गिरफ्तार करें। मैं एक आजाद नागरिक हूं, यह सब क्या है? मेरे अनशन के 26वें दिन वे पिछले 3 घंटों से मेरा दिमाग खा रहे हैं। आप सब मुझे परेशान कर रहे हैं। अगर तनाव से मेरी मौत होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी आप पर होगी। दरवाजा खोलिए, मैं जा रहा हूं, अगर आप चाहते हैं तो मुझे गिरफ्तार कर लीजिए।"
😞 '11 किलो वजन घट गया, क्या अब मुझे कैरेक्टर सर्टिफिकेट देना होगा?': वांगचुक का छलका दर्द
आगे अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा, "दोस्तों, यह वीडियो मैं थोड़े दुख, थोड़ी हैरानी, थोड़े गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं। अपने भाइयों-बहनों और छात्रों के लिए 26 दिन भूखा रहने के बाद, जिसमें मेरा 11 किलो वजन घट चुका है, मांसपेशियां (मसल्स) खत्म हो गई हैं, और शरीर के बाकी अंग व दिमाग कभी न ठीक होने वाले नुकसान की कगार पर पहुंच चुके हैं। वह भी लद्दाख की कड़कती ठंड से दिल्ली की तपती धूप में बैठकर यह सब करने के बाद... क्या मुझे अब किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था?"
उन्होंने सवाल उठाया कि "मैंने अनशन तोड़ा तो किसके हाथों तोड़ा, उसके हाथों क्यों तोड़ा, इसके हाथों क्यों नहीं तोड़ा... क्या डील हुई, क्या सौदा हुआ... क्या अब मुझे इन सब फिजूल बातों का जवाब देना होगा?"
😡 'धिक्कार है ऐसी सोच पर': वांगचुक बोले- सौदा करना होता तो एसी कमरे में बैठकर करता
वांगचुक ने आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए आगे कहा, "मैं कल से लिक्विड फूड ले रहा हूं, तो शरीर में थोड़ी जान आई है। बदकिस्मती से वह जान मुझे इन आरोपों का जवाब देने में लगानी पड़ रही है। सुबह से कई लोग मुझे फोन करके या सोशल मीडिया पोस्ट दिखाकर बता रहे हैं कि मुझ पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि केंद्रीय मंत्रियों से अनशन क्यों तुड़वाया, किसी और से क्यों नहीं।"
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अगर मुझे सौदा या डील ही करना होता तो क्या मैं 26 दिन तक भूखा रहता? कितनों ने सौदे किए हैं, आपने देखा होगा कि वे किस तरह डील करते हैं। क्या मैं किसी आलीशान एयरकंडीशंड कमरे में बैठकर डील नहीं कर सकता था? मुझे यहां दिल्ली की तपती धूप में सड़क किनारे बैठकर डील करने की क्या जरूरत थी? धिक्कार है ऐसे देश पर, जिसमें ऐसे दिमागों की उपज होती है और जिनसे ऐसे नीच ख्यालात निकलते हैं।"
🤝 'मैं केवल केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अनशन नहीं तोड़ना चाहता था', सभी नेताओं की मौजूदगी की थी मांग
एक अन्य वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्ति की परिस्थितियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "मैं केवल केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अपना अनशन नहीं तोड़ना चाहता था। इसीलिए मैंने बार-बार अनुरोध किया था कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के ज्यादा से ज्यादा सांसद, CJP के हमारे छात्र नेता और लद्दाख से आए प्रतिनिधि भी इस दौरान मौजूद रहें, ताकि मैं उन सभी की उपस्थिति में अपना अनशन समाप्त कर सकूं। लेकिन दुख की बात यह है कि प्रशासन द्वारा मुझे किसी से भी मिलने नहीं दिया गया।"

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