Page Nav

HIDE

Breaking News:

latest

छात्र आंदोलनों पर किरण बेदी की PM मोदी और अमित शाह को सलाह: 'पुलिस से पहले तैनात हो सिविल डिफेंस'

  रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल (LG) किरण बेदी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन से सबक लेते...

 


रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल (LG) किरण बेदी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन से सबक लेते हुए केंद्र सरकार को एक नया विचार दिया है।

किरण बेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए सुझाव दिया है कि जिस तरह देश की सीमाओं पर सेना से आगे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को तैनात किया जाता है, ठीक उसी तरह छात्र आंदोलनों को संभालने के लिए पुलिस से आगे 'सिविल डिफेंस' (Civil Defence) को तैनात किया जाना चाहिए। इन कर्मियों के पास लाठी-डंडा या अन्य कोई हथियार न हो। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने या जरूरत पड़ने पर ही पुलिस को आगे किया जाए।

जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रही CJP और दिल्ली पुलिस के बीच पिछले कुछ दिनों में कई बार हिंसक टकराव देखने को मिला है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने छात्रों पर बर्बरतापूर्वक कार्रवाई की, वहीं झड़पों में कई पुलिसकर्मी भी बुरी तरह घायल हुए हैं। इसी स्थिति को देखते हुए पूर्व अधिकारी ने सिविल डिफेंस वाले विचार पर गौर करने की सलाह दी है और एक वीडियो जारी कर अपनी राय साझा की है।

🪖 'सीमा पर BSF की तरह पुलिस से पहले सिविल डिफेंस को बनाएं पहली ढाल'

किरण बेदी ने कहा कि उपद्रवी या आक्रोशित छात्रों से निपटने के लिए यह एक सुरक्षित और व्यावहारिक रास्ता है, जिस पर सरकार विचार कर सकती है।

दिल्ली पुलिस, गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी को टैग करते हुए उन्होंने कहा, "छात्रों और पुलिस के बीच सीधे टकराव से बचने के लिए प्रशिक्षित सिविल डिफेंस को आगे और उसके बाद पुलिस को तैनात करने की जरूरत है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस को प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर रखा जा सकता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिस तरह सीमाओं पर मुख्य सेना से पहले BSF की तैनाती होती है, उसी तरह आंतरिक सुरक्षा में पुलिस से पहले सिविल डिफेंस को स्थिति संभालने का मौका मिलना चाहिए।

🚫 'हाथ में लाठी न हो, केवल शील्ड और हेलमेट रहें': बेदी ने समझाया पूरा फॉर्मूला

किरण बेदी ने कहा कि जब मामला सिविल डिफेंस के नियंत्रण से बाहर हो जाए, तभी पुलिस को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य में सिविल डिफेंस और होम गार्ड विभाग मौजूद हैं, जिनमें वेतन पर नियुक्त प्रशिक्षित युवा पुरुष और महिलाएं शामिल हैं। छात्र आंदोलनों के समय वे पहली रक्षा पंक्ति (First Line of Defence) बन सकते हैं। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधे हिंसक टकराव को रोका जा सकेगा।

प्रयोग के तौर पर इसे आजमाने का सुझाव देते हुए बेदी ने कहा कि सिविल डिफेंस कर्मियों के हाथ में कोई लाठी-डंडा नहीं होना चाहिए। उनके पास केवल केन शील्ड (Cane Shield), बॉडी आर्मर और हेलमेट हो, ताकि वे खुद को पत्थर या लाठियों से बचा सकें। इसके बाद पूरी जिम्मेदारी प्रदर्शनकारी छात्रों पर होगी कि वे ऐसी स्थिति न बनाएं जिससे पुलिस को आगे आना पड़े। बेदी ने कहा कि पुलिस केवल तभी आगे आएगी जब जान-माल की सुरक्षा का गंभीर खतरा हो। इससे एक-दूसरे पर लगने वाले आरोप-प्रत्यारोप से बचा जा सकेगा।








कोई टिप्पणी नहीं