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किरण बेदी की केंद्र को नसीहत- युवाओं की मांगों को आलोचना न समझे सरकार, रचनात्मक विचारों पर करे काम

नई दिल्ली: हाल ही में दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल और पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी का बड़ा बयान साम...



नई दिल्ली: हाल ही में दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पुडुचेरी की पूर्व उप-राज्यपाल और पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी का बड़ा बयान सामने आया है। एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपना उत्तरदायित्व निभाते हुए जेन-जी (Gen-Z) युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुनना चाहिए और उसमें से रचनात्मक बिंदुओं पर तुरंत काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार ही अंतिम अथॉरिटी है, इसलिए उस पर भरोसा करना स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि सरकार ने तुरंत टास्क फोर्स गठित कर काबिल लोगों को शामिल किया है, लेकिन इस प्रक्रिया को केवल टेस्टिंग तक सीमित न रखकर शिक्षा व्यवस्था में बड़े और दूरगामी सुधारों तक विस्तारित किया जाना चाहिए।

⚠️ "युवाओं की मांगों को आलोचना न समझें": PM के लिए अपमानजनक भाषा और घटते सम्मान पर जताई चिंता

किरण बेदी ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि युवाओं को सड़कों पर उतरने से रोका नहीं जा सकता क्योंकि हर किसी की अपनी भावनाएं, जरूरतें और विजन होता है। सरकार को उनकी मांगों को आलोचना के रूप में लेने के बजाय संवेदनशील प्रतिक्रिया देनी चाहिए। जिम्मेदार सरकार को सोशल मीडिया पर आ रहे विचारों में से रचनात्मक विचारों को अपनाना चाहिए और विनाशकारी विचारों का सही ढंग से जवाब देना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर दुख जताते हुए किरण बेदी ने कहा कि दुर्भाग्य से यह अब हमारी आधुनिक संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है और इसे बर्दाश्त भी किया जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि युवाओं द्वारा बड़ों और माता-पिता के पैर छूने तथा पारंपरिक सम्मान देने की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

🎓 धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NEET विवाद पर बोलीं किरण बेदी: 'समय रहते निर्णय लेते तो इतना नुकसान न होता'

पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर पूर्व IPS अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि इस मामले को इतना खींचने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब विवाद चरम पर था, तब यदि इस्तीफे की पेशकश की गई थी, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाना चाहिए था। इसमें ईगो (अहंकार) को बीच में नहीं आना चाहिए था।

अंग्रेजी कहावत "A stitch in time saves nine" (समय पर उठाया गया एक कदम बड़े नुकसान से बचाता है) का हवाला देते हुए किरण बेदी ने कहा कि अगर समय रहते इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता, तो बात इतनी आगे नहीं बढ़ती। तब तक NEET का मामला घर-घर तक पहुंच चुका था और व्यापक नुकसान हो चुका था।







 

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