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Delhi NGT Order: साकेत के सैदुलाजाब में चलेगा बुलडोजर, एनजीटी का 4 महीने में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का निर्देश

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बड़े बुलडोजर एक्शन के संकेत मिल रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली सरकार को 4 महीने क...



नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर बड़े बुलडोजर एक्शन के संकेत मिल रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली सरकार को 4 महीने के भीतर दक्षिण दिल्ली के साकेत स्थित सैदुलाजाब की संरक्षित वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई कानून के अनुसार समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।

जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश 'भ्रष्टाचार हटाओ सोसाइटी' की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि साकेत के सैदुलाजाब में स्थित कीमती वन भूमि पर भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और वहां धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया जा रहा है।

🌳 कागजों में 19 बीघा, मौके पर बची सिर्फ 6.12 बीघा जमीन: संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

एनजीटी ने अपने आदेश में मई 2024 में गठित संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र में हरियाली और पेड़ खत्म हो चुके हैं तथा वहां पक्के अवैध निर्माण खड़े हो गए हैं। राजस्व अभिलेखों और सरकारी अधिसूचना में इस वन भूमि का क्षेत्रफल 19 बीघा दर्ज है, जबकि स्थल निरीक्षण के दौरान मौके पर केवल 6.12 बीघा भूमि ही बची पाई गई।

रिपोर्ट में बताया गया कि पेड़ों की घनी छाया में भारी कमी आई है, बाउंड्री वॉल जगह-जगह से टूटी हुई है और कचरे के ढेर जमा हैं। इस वजह से स्थानीय पक्षियों और जीवों के प्राकृतिक आवास पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। समिति ने पाया कि इस पर्यावरणीय क्षति की भरपाई नए पौधे लगाकर भी नहीं की जा सकती, जिससे यह नुकसान स्थायी स्वरूप ले चुका है।

⚖️ हाईकोर्ट और वन अधिकारी से याचिकाएं खारिज: एनजीटी ने भूजल में यूरेनियम मामले पर भी मांगी रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि पूर्व में जारी तोड़फोड़ नोटिस को प्रभावित पक्षों द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने प्रभावितों को भारतीय वन अधिनियम के तहत 'वन व्यवस्था अधिकारी' के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। हालांकि, 7 मई 2026 को वन व्यवस्था अधिकारी द्वारा इन सभी आवेदनों को खारिज कर दिया गया, जिसके बाद अब वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का कानूनी रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए एनजीटी ने 4 महीने के भीतर पूरी वन भूमि को खाली कराने का निर्देश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। इसके अलावा, एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों के भूजल में 15 फीसदी नमूनों में यूरेनियम मिलने संबंधी रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और दिल्ली सरकार से भी जवाब तलब किया है।







 

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