जंतर-मंतर के पास बुधवार रात हुए पथराव और बवाल से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने पथराव ...
जंतर-मंतर के पास बुधवार रात हुए पथराव और बवाल से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने पथराव में अपने समर्थकों के शामिल होने की बात से इनकार करते हुए इसका ठीकरा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर फोड़ा है। दीपके ने गुरुवार सुबह मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन को बड़ा होते देख भाजपा अपने गुंडों को भेज रही है।
🗣️ अभिजीत दीपके का आरोप: 'पुलिस लाती है पत्थर, बीजेपी वाले करते हैं पथराव'
दो दिनों से पथराव और पुलिस पर हमले की हिंसक घटनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा, "बाहर से लोग भेजे जा रहे हैं प्रोटेस्ट को खराब करने के लिए। हम यहां एक महीने से बैठे हुए थे और तब कोई वारदात नहीं हुई। लेकिन अब जैसे ही प्रोटेस्ट बड़ा हो गया है, बीजेपी द्वारा बाहर से गुंडे भेजे जा रहे हैं ताकि लोगों को उकसाया जा सके।"
अभिजीत दीपके ने पथराव के पीछे पुलिस और बीजेपी की मिलीभगत का दावा करते हुए कहा, "बीजेपी के लोग हैं जो पथराव कर रहे हैं। पुलिस यहां पत्थर वाले ट्रक लाकर खड़ा करती है और बीजेपी के गुंडे आकर पथराव करते हैं। इसके बाद वे कॉकरोच जनता पार्टी के लोगों को बदनाम करते हैं।"
🚑 जमकर हुआ पथराव, 2 ACP समेत 6 पुलिसकर्मी घायल
जंतर-मंतर के पास रात को प्रदर्शनकारियों ने जमकर पथराव किया। इस घटना में कम से कम दो सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) और चार पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस के बयान के अनुसार, पहली घटना शाम लगभग 4:30 बजे हुई, जब प्रदर्शनकारियों के पथराव में पंजाबी बाग उपमंडल में तैनात एसीपी जय प्रकाश के माथे पर पत्थर लग गया, जिससे वे घायल हो गए। इसके बाद रात में एक बार फिर पुलिस को निशाना बनाया गया, जिसमें एक अन्य एसीपी को गहरी चोटें आईं। उन्हें पहले आरएमएल (RML) अस्पताल और बाद में एम्स (AIIMS) में भर्ती कराया गया।
🚔 उपद्रवियों की तलाश में जुटी पुलिस, कार्रवाई का विरोध कर रहा विपक्ष
अभिजीत दीपके भले ही पथराव और हिंसा करने वालों को 'बीजेपी के गुंडे' बता रहे हैं, लेकिन सीजेपी और विपक्षी दलों द्वारा पुलिस कार्रवाई का लगातार विरोध किया जा रहा है।
20 जुलाई की हिंसा के बाद पकड़े गए लोगों को छुड़ाने के लिए 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल थाने पहुंचे थे। वहीं 26 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने भी सरकार के सामने यही शर्त रखी है कि किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए।

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