सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में दो घंटे क...
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में दो घंटे का 'मौन आंदोलन' (चुप रहकर विरोध) किया। अन्ना के सहयोगी दत्ता अवारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) को बताया कि अन्ना ने गुरुवार सुबह 11 बजे अपना मौन आंदोलन शुरू किया और दोपहर 1 बजे इसे समाप्त किया। अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास मौन आंदोलन करने के बाद अन्ना हजारे अपने गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए।
✉️ PM मोदी को लिखा पत्र: 'धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरेगी'
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और हिंसा की खबर बेहद दुखद है। पीएम मोदी को लिखे पत्र में हजारे ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
हजारे ने लिखा कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा देने को कहा जाए तो इससे सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि इससे सरकार का कामकाज अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगा। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, विश्वास का माहौल बनाने और सकारात्मक संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का अनुरोध किया।
📢 'पेपर लीक और बेरोजगारी से परेशान हैं लाखों युवा, शीर्ष पद संभालें जिम्मेदारी'
अन्ना हजारे ने कहा कि देश के लाखों युवा परीक्षा के पेपर लीक होने, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर चिंतित हैं। इन चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था के मामले के तौर पर नहीं, बल्कि जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।
अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि जब भी कोई गड़बड़ी या घोटाला सामने आता है, तो अक्सर जिम्मेदारी सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों पर डाल दी जाती है, जबकि अच्छे नतीजों का श्रेय सरकार ले लेती है। उन्होंने कहा कि असल जिम्मेदारी तो ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की होती है। लोकतंत्र में टकराव के बजाय बातचीत हमेशा बेहतर रास्ता है, इसलिए प्रधानमंत्री जनता की आवाज को केवल राजनीतिक विरोधियों की आवाज न समझें।
🏛️ विपक्षी दलों की मांग और गर्म होती सियासत के बीच अन्ना का कदम
अन्ना हजारे का प्रधानमंत्री को लिखा यह पत्र ऐसे समय में आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां नीट (NEET) पेपर लीक तथा विभिन्न प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधलियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की लगातार मांग कर रही हैं।

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