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Smart Mobility & Connected Cars: अब ट्रैफिक जाम में फंसे वाहनों को मिलेगी नई राहत, वी2वी तकनीक पर जोर

सुबह ऑफिस जाते वक्त ट्रैफिक जाम में फंस जाना आम बात है, जिससे लेट होने की टेंशन बढ़ जाती है। लेकिन सोचिए, अगर आपकी कार खुद जाम की जानकारी दे...

सुबह ऑफिस जाते वक्त ट्रैफिक जाम में फंस जाना आम बात है, जिससे लेट होने की टेंशन बढ़ जाती है। लेकिन सोचिए, अगर आपकी कार खुद जाम की जानकारी देकर खाली रास्ता सुझाए और चौराहे पर ट्रैफिक लाइट भी उसके हिसाब से ग्रीन हो जाए, तो सफर कितना आसान हो सकता है। यही है स्मार्ट मोबिलिटी, जहां मोबाइल से शुरू हुई डिजिटल क्रांति अब गाड़ियों, सड़कों और फैक्ट्रियों तक तेजी से पहुंच रही है। दिल्ली के यशोभूमि में 7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में इसी बदलती हुई डिजिटल दुनिया की एक अद्भुत झलक देखने को मिली है।

📱 135 करोड़ से अधिक मोबाइल यूजर: 99.9% जिलों तक पहुंचा 5.5 लाख से ज्यादा 5G बेस स्टेशनों का नेटवर्क

इंडिया मोबाइल कांग्रेस का यह 10वां संस्करण था, जिसकी थीम ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ रखी गई थी। इस कार्यक्रम में स्मार्ट गाड़ियों, रोबोटिक्स और हाईटेक स्टेडियम जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस रहा। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, भारत में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या 135 करोड़ और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 109 करोड़ से अधिक हो चुकी है। देश के 99.9% जिलों में 5.5 लाख से ज्यादा 5G बेस स्टेशन चालू किए जा चुके हैं, जो नई कनेक्टेड तकनीकों के विस्तार में रीढ़ की हड्डी साबित हो रहे हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा V2V (व्हीकल-टू-व्हीकल) कम्युनिकेशन नियमों के मसौदे से आने वाले समय में सड़क यात्राएं और अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है।

🤖 AI और भविष्य की तकनीक: नौकरियों के बदलते स्वरूप के साथ छोटे शहरों तक पहुंचेंगे डिजिटल अवसर

जैसे-जैसे तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे काम करने के तरीकों में भी बड़े बदलाव आ रहे हैं। ऑटो कंसल्टेंसी के आंकड़ों के मुताबिक नई गाड़ियों में कनेक्टेड फीचर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। हालांकि, रूटीन काम ऑटोमेट होने से कुछ नौकरियों के स्वरूप में बदलाव आ सकता है, लेकिन रोबोटिक्स और प्रोग्रामिंग जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि लोकल लैंग्वेज में किफायती AI सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो छोटे शहरों और गांवों के किसान और छोटे कारोबारी भी इसका पूरा लाभ उठाकर अपनी आय और उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।






 

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