दिल्ली हाई कोर्ट ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर पत्रकारों के खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज आपराधिक मामले की जांच पर रोक लगाने से साफ इनक...
दिल्ली हाई कोर्ट ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर पत्रकारों के खिलाफ एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज आपराधिक मामले की जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। पत्रकारों और CJP (सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के अन्य सदस्यों ने एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद एसीपी की शिकायत पर इन पत्रकारों के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने का मामला दर्ज किया गया था। इस एफआईआर को चुनौती देते हुए दो पत्रकारों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है, लेकिन फिलहाल जांच प्रक्रिया पर किसी भी तरह की रोक लगाने से मना कर दिया है।
🔍 जस्टिस मिनी पुषकरणा की अदालत में हुई सुनवाई: 17 नवंबर को अगली तारीख, पत्रकारों ने की है FIR रद्द करने की मांग
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिनी पुषकरणा ने स्पष्ट किया कि, "मैं अभी सिर्फ नोटिस जारी कर रही हूं, जवाब आने के बाद मामले के मेरिट्स पर सुनवाई की जाएगी और जांच जारी रहेगी।" अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान पत्रकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने जांच पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने फिलहाल ठुकरा दिया। गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को बूटा सिंह चौक पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान यह विवाद हुआ था। स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर असल में उनकी शिकायत का बदला है। वहीं, पत्रकारों ने हाई कोर्ट से गिरफ्तारी और कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

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