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Subhash Chandra Bose INA Trust: लालती राम ट्रस्ट की याचिका पर अदालत की दो टूक, मेमोरियल निर्माण में दखल से किया मना

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है. इस याचिका में मांग की गई थी कि भारत की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है. इस याचिका में मांग की गई थी कि भारत की आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाली सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (INA) के शहीदों के बलिदान को याद रखने के लिए ऐतिहासिक लाल किले पर एक समर्पित स्मारक (मेमोरियल) बनाया जाए. हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्मारक के निर्माण और उसके लिए जमीन का आवंटन करने का फैसला पूरी तरह से सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है.

⚖️ 'मेमोरियल बनाना कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं': मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने कही यह बात

मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लाल किले पर स्मारक बनाया जाना चाहिए या नहीं, इसका निर्णय केंद्र सरकार को लेना है और अदालत इस नीतिगत मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती. यह याचिका 'महान स्वतंत्रता सेनानी लालती राम ट्रस्ट' की ओर से दायर की गई थी, जिसमें संस्कृति मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और ASI को स्मारक के निर्माण के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा कि रिट पिटीशन के जरिए इस तरह के आदेश नहीं दिए जा सकते.

📜 'पीआईबी की विज्ञप्ति कानूनी अधिकार का आधार नहीं': याचिका का हुआ निपटारा

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि सरकार ने 2 अगस्त 2021 को लोकसभा में दिए गए जवाब में लाल किले में INA स्मारक के प्रस्ताव को स्वीकार किया था. इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की प्रेस विज्ञप्तियों या सरकारी घोषणाओं को सीधे तौर पर किसी कानूनी अधिकार की मांग का आधार नहीं बनाया जा सकता. हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी है कि वे संबंधित केंद्रीय मंत्रालय से संपर्क कर दस्तावेजों के साथ अपना विस्तृत प्रतिवेदन सौंप सकते हैं.







 

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