दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित एक निजी अस्पताल से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक जब बांझपन (इनफर्टिलिटी) का इलाज कर...
दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित एक निजी अस्पताल से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक जब बांझपन (इनफर्टिलिटी) का इलाज कराने पहुंचा, तो शुरुआती जांच में उसके स्पर्म में शुक्राणु नहीं मिले। इसके बाद जब अन्य जेनेटिक और इमेजिंग टेस्ट किए गए, तो उसके पेट के अंदर गर्भाशय (यूटेरस) और फैलोपियन ट्यूब जैसी संरचनाएं होने का पता चला, जो आमतौर पर महिलाओं के शरीर में पाई जाती हैं। इसके साथ ही उसके दोनों अंडकोष भी असामान्य स्थिति में पेड़ू के अंदर ही पाए गए, जिसके बारे में युवक को पहले कोई जानकारी नहीं थी।
🔍 2. पीएमडीएस (PMDS) नाम की दुर्लभ स्थिति का हुआ खुलासा, एमआरआई स्कैन में पेट के अंदर दिखे दोनों अंडकोष और मुलेरियन संरचनाएं
आरजी अस्पताल में हुई जांच के दौरान एमआरआई स्कैन से यह साफ हुआ कि मरीज 'पर्सिस्टेंट मुलेरियन डक्ट सिंड्रोम' (PMDS) नामक अत्यंत दुर्लभ स्थिति से पीड़ित है। यह एक ऐसी जन्मजात स्थिति होती है जिसमें किसी पुरुष के शरीर में गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब जैसी संरचनाओं का विकास हो जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के दोनों अंडकोष बहुत छोटे और पेट के अंदर ही सिकुड़ी हुई स्थिति में थे, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय था क्योंकि पेट में लंबे समय तक नीचे न उतरे रहने वाले अंडकोषों में टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
🔬 3. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए हटाए गए अंडकोष, बायोप्सी जांच में बाएं टेस्टिस में मिले कैंसर से पहले के बदलाव (GCNIS)
मरीज की उम्र, गंभीर जोखिम और कैंसर की आशंका को देखते हुए चीफ यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुशील खरबंदा और उनकी टीम ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर मुलेरियन संरचनाओं और दोनों अंडकोषों को बाहर निकाल दिया। सर्जरी के बाद जब निकाले गए टिश्यू की माइक्रोस्कोप से जांच की गई, तो सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बाएं अंडकोष में 'जर्म सेल नियोप्लासिया इन सीटू' (GCNIS) के लक्षण पाए गए, जो कि कैंसर से पहले का बदलाव था। डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के बांझपन और नीचे न उतरे अंडकोषों की समय पर सही जांच कितनी जरूरी है।

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