सितंबर के आखिरी दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर जनजीवन की रफ्तार पूरी तरह थाम दी है. इसकी एक प्रमुख वजह ...
सितंबर के आखिरी दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर जनजीवन की रफ्तार पूरी तरह थाम दी है. इसकी एक प्रमुख वजह 'अर्नब चक्रवात' (Cyclone Arnab) का असर बताया जा रहा है, जिसके चलते उत्तराखंड से लेकर झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश तक भारी तबाही देखने को मिल रही है. उत्तर प्रदेश में जहां भारी बारिश और तेज हवाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा और 100 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो गए, वहीं उत्तराखंड में सुरक्षा के मद्देनजर चारधाम यात्रा को 27 सितंबर तक के लिए स्थगित करना पड़ा है. बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल समेत कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है.
🌊 2. झारखंड में नदियां खतरे के निशान से ऊपर, रांची में कई उड़ानें रद्द और स्कूल बंद
झारखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण निचले इलाकों में भयंकर जलभराव हो गया है, जिससे लोगों को घुटने तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है. पूर्वी सिंहभूम में सुवर्णरेखा नदी खतरे के निशान से 2.02 मीटर और खरकई नदी 4.50 मीटर ऊपर बह रही है, जबकि रांची के हटिया और गेतलसूद बांधों का जलस्तर भी खतरनाक रूप से बढ़ गया है. खराब मौसम और भारी बारिश के चलते बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से कम से कम छह उड़ानें रद्द करनी पड़ीं तथा रांची व जमशेदपुर समेत कई जिलों में स्कूलों को बंद रखना पड़ा.
🌀 3. ओडिशा में 14,500 लोग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए, छत्तीसगढ़ में भी सभी स्कूल बंद
ओडिशा में गहरे दबाव के क्षेत्र के कारण कई स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. दक्षिणी और पश्चिमी ओडिशा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से करीब 14,500 लोगों को निकालकर 2,061 सुरक्षित राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है, जहां नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और कई सड़कें भूस्खलन के कारण बाधित हैं. इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में लगातार भारी बारिश और नदियों-नालों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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