बल्लभगढ़ के सीही गांव में रविवार शाम करीब छह बजे एक बड़ा हादसा हो गया, जब तीन साल की मासूम बच्ची नेहा खेलते समय एक पुराने खुले बोरवेल में जा...
बल्लभगढ़ के सीही गांव में रविवार शाम करीब छह बजे एक बड़ा हादसा हो गया, जब तीन साल की मासूम बच्ची नेहा खेलते समय एक पुराने खुले बोरवेल में जा गिरी. घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया. करीब दस घंटे तक चले लंबे और कठिन रेस्क्यू अभियान के बाद सोमवार सुबह 3:55 बजे बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला गया और तुरंत सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
🚧 2. 120 फीट की गहराई पर आने लगा था पानी, सेना, NDRF और SDRF की टीमों ने रातभर की कड़ी मशक्कत
बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी थी. एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) के अलावा गाजियाबाद से सेना की एक विशेष टुकड़ी भी मौके पर बुलाई गई और रातभर लगातार खुदाई का काम चलता रहा. बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जमीन में करीब 120 फीट की गहराई पर जाने के बाद पानी आने लगा था, जिससे रेस्क्यू की रफ्तार काफी प्रभावित हुई. इसके बावजूद जवानों ने पानी और मुश्किल हालातों के बीच हार नहीं मानी और बोरवेल के समानांतर सुरंग खोदकर बच्ची तक पहुंचे.
⚠️ 3. खुले और पुराने बोरवेल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, गांव में पसरा मातम और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
अस्पताल में बच्ची की मौत की पुष्टि होने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. यह घटना नगर निगम के पार्क की जमीन पर बने उस पुराने और खुले बोरवेल में हुई, जिसका ढक्कन गायब था. इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर से खुले और लावारिस पड़े बोरवेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते ऐसे खतरनाक बोरवेलों को बंद करवाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का गम न झेलना पड़े.

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