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Drishti IAS Founder News: बेटिंग और ट्रेडिंग प्रचार वाले डीपफेक वीडियो पर हाईकोर्ट सख्त, डिजिटल प्लेटफॉर्म को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने 'Drishti IAS' के मशहूर संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति की पहचान, नाम और तस्वीर का कथित तौर पर बिना किसी अनुमति के कमर्...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 'Drishti IAS' के मशहूर संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति की पहचान, नाम और तस्वीर का कथित तौर पर बिना किसी अनुमति के कमर्शियल और डिजिटल इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम समेत तमाम प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत उनके नाम और फोटो का उपयोग करके बनाए गए तमाम फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, चैनलों और आपत्तिजनक डीपफेक (Deepfake) सामग्री को तुरंत हटाने के लिए कहा गया है. यह पूरा मामला विकास दिव्यकीर्ति की तरफ से दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया है.

🚫 बैटिंग और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार वाले फर्जी वीडियो का मामला, जस्टिस एजे भंभानी ने की सुनवाई

यह पूरा मामला जस्टिस एजे भंभानी की अदालत में सुना गया. याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए थे कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स और चैनलों द्वारा उनके नाम और तस्वीर का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा, इंटरनेट पर कुछ ऐसे डीपफेक वीडियो भी सामने आए थे जिनमें उन्हें कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स का प्रचार करते हुए दिखाया गया था. विकास दिव्यकीर्ति का साफ कहना है कि ये सभी वीडियो उनकी बिना किसी सहमति या अनुमति के तैयार किए गए हैं या उनमें छेड़छाड़ की गई है.

💻 सुनवाई के दौरान दिखाए गए एडिटेड वीडियो और लेक्चर की क्लिप, डीपफेक टूल्स पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अदालत को उनके ऑनलाइन लेक्चर्स के कुछ वीडियो और एडिटेड क्लिप्स भी दिखाए. दलील दी गई कि कुछ वीडियो को इस तरह से मॉर्फ या एडिट किया गया है और उनके साथ अलग कैप्शन जोड़े गए हैं, जिससे मूल लेक्चर का संदर्भ और अर्थ पूरी तरह बदल जाता है. इस दौरान कोर्ट में डीपफेक और एआई जनरेटेड डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले टूल्स को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई. जस्टिस भंभानी ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि आज के समय में ऐसे शक्तिशाली डिजिटल टूल्स बेहद आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग करने वाले लोगों की सही पहचान करना हमेशा आसान नहीं होता.

🛡️ मेटा और याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों की दलीलें, प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर हुई बहस

मेटा (Meta) की ओर से पेश हुए वकील वरुण पाठक ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी यूजर द्वारा प्लेटफॉर्म के फीचर्स का गलत इस्तेमाल किए जाने के लिए हर परिस्थिति में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्लेटफॉर्म्स कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं से अधिक यूजर्स की निजी पहचान से जुड़ी जानकारियां एकत्र नहीं कर सकते. वहीं, विकास दिव्यकीर्ति की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) दिया कपूर ने ऐसे डिजिटल फीचर्स का जिक्र किया जिसके जरिए किसी अन्य व्यक्ति के वीडियो का इस्तेमाल करके उस पर अपना प्रदर्शन या आवाज जोड़ी जा सकती है, जिससे मूल सामग्री को गलत संदर्भ में पेश किया जाता है.







 

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