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Dipanshu Shokeen Wins DUSU Polls: एनएसयूआई से बगावत कर छात्रसंघ चुनाव में मारी बाजी, वीर चतरथ का टिकट मिलने पर हुआ था विवाद

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही सभी छात्र संगठनों ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। इस बीच एनएसयूआई के कार्यकर्ता द...

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही सभी छात्र संगठनों ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। इस बीच एनएसयूआई के कार्यकर्ता दीपांशु शौकीन भी उपाध्यक्ष पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन जब प्रत्याशियों के नामों की घोषणा हुई तो एनएसयूआई ने वीर चतरथ को उपाध्यक्ष पद का टिकट थमा दिया। टिकट कटने से नाराज दीपांशु ने एनएसयूआई से बगावत कर अपने दम पर चुनाव लड़ने का साहसिक फैसला किया और अंततः बंपर जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया।

🏛️ 2. कांग्रेस नेता के बेटे वीर चतरथ को टिकट मिलने पर उठे सवाल, चर्चाओं के बाजार में रही राजनीतिक खींचतान

एनएसयूआई द्वारा जारी पैनल में अध्यक्ष पद के लिए विजयशंकर मीणा, उपाध्यक्ष के लिए वीर चतरथ, सेक्रेटरी के लिए नम्रता चौधरी और जॉइंट सेक्रेटरी के लिए गोपाल चौधरी के नाम घोषित किए गए थे। इनमें वीर चतरथ का नाम सबसे चौंकाने वाला था, क्योंकि उस पद के मुख्य दावेदार दीपांशु शौकीन माने जा रहे थे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि वीर चतरथ कांग्रेस नेता मनीष चतरथ के बेटे हैं, जिसके चलते उन्हें प्राथमिकता मिली और दीपांशु का पत्ता कट गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी बहस छिड़ी रही।

📉 3. एनएसयूआई का खाता तक नहीं खुला, दीपांशु को दरकिनार करने और कन्हैया कुमार-विनोद जाखड़ की आलोचना पर टिकी निगाहें

इस बार के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई का खाता तक नहीं खुल सका, जहां एबीवीपी ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया वहीं एक पद पर बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दीपांशु का टिकट काटने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। इस फैसले को लेकर एनएसयूआई के नेताओं कन्हैया कुमार और नेशनल प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ की भी जमकर आलोचना हो रही है, हालांकि नेतृत्व का कहना था कि दीपांशु अपनी शर्तों पर चुनाव लड़ना चाहते थे।







 

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