नई दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष लता गुप्ता ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का कड़े शब्दों में संज्ञान लेते हुए जवाहरलाल ...
नई दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष लता गुप्ता ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो का कड़े शब्दों में संज्ञान लेते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्रों द्वारा एक प्रोफेसर पर लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के मामलों पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है. वायरल वीडियो में छात्रों का आरोप है कि उन्होंने मई 2026 में ही संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ JNU कुलपति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक इस मामले में कोई अपेक्षित और ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.
📋 2. छात्रों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप, प्रशासन पर प्रोफेसर को बचाने का प्रयास करने का किया गया है दावा
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के माध्यम से छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि प्रशासन मामले में उचित कानूनी कदम उठाने के बजाय संबंधित प्रोफेसर को बचाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, दिल्ली महिला आयोग इन आरोपों को प्रथम दृष्टया ही सत्य नहीं मान रहा है, बल्कि संबंधित प्राधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब कर मामले की वास्तविक और निष्पक्ष स्थिति स्पष्ट करना चाहता है ताकि सच्चाई सामने आ सके.
⚖️ 3. डीसीडब्ल्यू ने POSH अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई पर मांगा जवाब, 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने के दिए निर्देश
दिल्ली महिला आयोग ने JNU प्रशासन से स्पष्ट रूप से पूछा है कि मई 2026 की शिकायत पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और क्या इसे POSH Act (Sexual Harassment of Women at Workplace Act) के तहत गठित इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (ICC) के पास भेजा गया था या नहीं. आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए JNU प्रशासन को निर्देश दिया है कि जांच की वर्तमान स्थिति और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तीन दिनों के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए.
🛡️ 4. अध्यक्ष लता गुप्ता बोलीं- शिक्षण संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं, निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है मकसद
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्रा या महिला द्वारा यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायत किए जाने पर उसकी समयबद्ध, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से जांच होना अत्यंत आवश्यक है. किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान में छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता. आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून के तहत निष्पक्ष कार्रवाई हो और पीड़ित को न्याय के लिए भटकना न पड़े.

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