दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी से जुड़े एक पॉक्सो (POCSO) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है. अदालत ने 7 साल की दुष्कर्म ...
दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी से जुड़े एक पॉक्सो (POCSO) मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है. अदालत ने 7 साल की दुष्कर्म पीड़िता के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाने वाले सत्र न्यायाधीश के उस संदेश की खुलकर प्रशंसा की है, जो उन्होंने फैसले के अंत में बच्ची के लिए लिखा था. न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने इस संदेश को प्रिंट करवाकर पीड़ित परिवार को सौंपने और मुआवजे के रूप में 10 लाख 50 हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं.
🏫 2. जज का संदेश: 'बेटा स्कूल जाओ, अपनी जिंदगी जियो, तुम्हारी हिम्मत को यह अदालत हमेशा याद रखेगी'
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रजनी रंगा की अदालत ने अपने फैसले में बच्ची के लिए एक भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश लिखा था, जिसमें उस इच्छा का भी जिक्र था कि आरोपी आजीवन जेल में रहे. जज ने फैसले में लिखा था कि "यह अदालत तुम्हारा बचपन वापस नहीं ला सकती, लेकिन यह भरोसा दिलाती है कि तुम्हारी बात सुनी गई. अब बेटा अपनी जिंदगी जियो, स्कूल जाओ, दोस्त बनाओ, हंसो, खेलो और सपने देखो. यह अदालत तुम्हारे साहस को हमेशा याद रखेगी." हाई कोर्ट ने इसी संदेश को पीड़ित परिवार तक सम्मान के साथ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.
🏛️ 3. दोषी सुमित शाक्य की अपील पर अब 20 जनवरी 2027 को होगी सुनवाई, दिल्ली विधिक सेवा को दिए निर्देश
यह पूरा मामला बुध विहार थाने में दर्ज पॉक्सो एक्ट से जुड़ा है, जो 23 जुलाई 2023 की घटना पर आधारित है. वारदात के समय पीड़िता 7 वर्ष की थी और अब वह 10 वर्ष की हो चुकी है. सत्र अदालत ने आरोपी सुमित शाक्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील की है. हाई कोर्ट की पीठ ने दिल्ली विधिक सेवा के सचिव को दो सप्ताह के भीतर मुआवजे और संदेश से जुड़े निर्देशों का पालन करने को कहा है, जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को तय की गई है.

कोई टिप्पणी नहीं