दिल्ली की सड़कों से आखिरी लाल AC लो-फ्लोर बस भी मंगलवार को पूरी तरह विदा हो गई है. इसके साथ ही दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के उस स्वर्णिम दौर क...
दिल्ली की सड़कों से आखिरी लाल AC लो-फ्लोर बस भी मंगलवार को पूरी तरह विदा हो गई है. इसके साथ ही दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के उस स्वर्णिम दौर का भी अंत हो गया है, जब सार्वजनिक बस सेवा की पहचान लाल AC और हरी नॉन-AC लो-फ्लोर बसों से हुआ करती थी. खास बात यह है कि यह DTC की ऐसी अंतिम बस भी थी, जिसका संपूर्ण मालिकाना हक और संचालन सीधे राज्य परिवहन विभाग के पास था, जबकि अब बाकी सभी बसें प्राइवेट कंसेशनायर कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट के तहत चलाई जा रही हैं.
🟡 2. 1948 की पीली-हरी बसों से लेकर 2007-11 की CNG लो-फ्लोर क्रांति तक का सफर
राजधानी में सरकारी बस सेवा की शुरुआत साल 1948 में हुई थी, जिसके बाद 1971 में DTC का गठन किया गया और शुरुआत में बसें पारंपरिक पीले-हरे रंग की हुआ करती थीं. इसके बाद 1990 के दशक के आखिर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली का पब्लिक ट्रांसपोर्ट डीजल से CNG पर शिफ्ट हुआ. वर्ष 2007 से 2011 के बीच कॉमनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर DTC ने करीब 3700 लो-फ्लोर CNG बसें बेड़े में शामिल कीं, जिनमें लाल रंग की AC और हरी रंग की नॉन-AC बसों ने दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को एक आधुनिक पहचान दी.
⚡ 3. नारंगी-नीली क्लस्टर बसों से होते हुए अब हल्के नीले रंग की इलेक्ट्रिक बसों तक पहुंचा दिल्ली का ट्रांसपोर्ट
वक्त के साथ दिल्ली की बसों के रंग और तकनीक दोनों में लगातार बदलाव आते रहे. साल 2011 में क्लस्टर बस प्रोजेक्ट के तहत निजी ऑपरेटरों की नारंगी और गहरे नीले रंग की AC बसें सड़कों पर उतरीं. अब मौजूदा दौर में दिल्ली का परिवहन पूरी तरह ग्रीन एनर्जी यानी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ चुका है. DTC ने साल 2022 से हल्के नीले रंग की आधुनिक इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर AC बसें शामिल करना शुरू कर दिया है, जिसमें जीपीएस, सीसीटीवी और पैसेंजर इंफॉर्मेशन जैसी हाई-टेक सुविधाएं मिल रही हैं.

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