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Drishti IAS Founder Vikas Divyakirti News: सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट और पहचान के इस्तेमाल के खिलाफ कोर्ट पहुंचे विकास दिव्यकीर्ति

दिल्ली: लोकप्रिय शिक्षाविद् और दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अपने व्यक्तित्व ...

दिल्ली: लोकप्रिय शिक्षाविद् और दृष्टि आईएएस कोचिंग संस्थान के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अपने व्यक्तित्व और निजता के अधिकारों (Personality Rights) की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है. यह मामला न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था, जिन्होंने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि इस मामले को उस समन्वय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाना चाहिए जो पहले से ही इसी तरह के निजता अधिकारों से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई कर रही है.

🛑 2. फर्जी प्रोफाइल बनाकर तस्वीरों के दुरुपयोग का आरोप, अमिताभ बच्चन और सलमान खान की तरह मांगी कानूनी सुरक्षा

विकास दिव्यकीर्ति की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिका में मुख्य रूप से तीन प्रकार के उल्लंघनों को उठाया गया है, जिसमें सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों के साथ फर्जी प्रोफाइल और भ्रामक पोस्ट शेयर किए जाने का गंभीर मामला शामिल है. देश में इससे पहले अमिताभ बच्चन, सलमान खान, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, श्री श्री रविशंकर, क्रिकेटर युवराज सिंह और फिजिक्स वाला के फाउंडर अलख पांडे सहित कई जानी-मानि हस्तियां अपने नाम, तस्वीर और अन्य पहचान संबंधी विशेषताओं के व्यावसायिक या अनाधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगवाने के लिए अदालत से कानूनी संरक्षण प्राप्त कर चुकी हैं.

🏛️ 3. समन्वय पीठ के समक्ष मंगलवार को होगी मामले की अगली सुनवाई, पैरोडी और व्यंग्य पर कोर्ट का रहा है स्पष्ट रुख

अदालत को यह अवगत कराया गया कि व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों से जुड़े कई अन्य मामले पहले से ही एक अन्य रोस्टर पीठ के पास विचाराधीन हैं. इसके बाद न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने निर्देश दिया कि इस याचिका को संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिस पर अब मंगलवार को सुनवाई होगी. गौरतलब है कि इससे पहले अदालतों ने यह स्पष्ट किया है कि यदि किसी हस्ती के व्यक्तित्व का इस्तेमाल व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि कार्टून, व्यंग्य या पैरोडी के रूप में किया जा रहा हो, तो व्यक्तित्व अधिकारों के नाम पर उस पर पूरी तरह रोक लगाने का दावा नहीं किया जा सकता है.







 

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